Advertisment

1 अगस्त से बढ़ जाएंगे जूते-चप्‍पलों के दाम: लंंबे समय तक फुटवियर देंगे आपका साथ, ये सर्टिफिकेट जरूरी; आया बड़ा अपडेट

Footwear prices Hike: ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने मार्केट में बिकने वाले सभी जूतों-चप्‍पलों के लिए नए क्वालिटी स्टैंडर्ड जारी किए हैं।

author-image
Aman jain
1 अगस्त से बढ़ जाएंगे जूते-चप्‍पलों के दाम: लंंबे समय तक फुटवियर देंगे आपका साथ, ये सर्टिफिकेट जरूरी; आया बड़ा अपडेट

Footwear prices Hike: ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने मार्केट में बिकने वाले सभी जूतों-चप्‍पलों (फुटवियर) के लिए नए क्वालिटी स्टैंडर्ड जारी कर दिए हैं।

Advertisment

बीआईएस के नए स्‍टैंडर्ड के आधार पर बने फुटवियर ज्‍यादा मजबूत और टिकाऊ तो बनेंगे ही, लेकिन इसके साथ ही फुटवियर की रेटों में भी बढ़ोतरी होगी।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के नए मानकों के लागू होते ही 1 अगस्त से जूते, सैंडल और चप्पल (फुटवियर) महंगे हो सकते हैं।

https://twitter.com/BansalNewsMPCG/status/1818169654743040442

इन स्टैंडर्ड में जूतों की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल होने वाली सामग्री और सुरक्षा जैसे कई पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

Advertisment

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने यह साफ कर दिया है कि नए नियम का पालन न करने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।

ज्‍यादा चलेंगे आपके फुटवियर

अब आपके फुटवियर से आपको फिसलन नहीं होगी और इसमें क्रैक भी नहीं आएगा। इसी के साथ-साथ आपके फुटवियर के ऊपर का सोल भी ज्‍यादा लचीला होगा।

2-3 महीने चलने वाला फुटवियर 7-8 महीने चलेगा। अगर आपको खराब फुटवियर की वजह से होने वाले घुटनों में दर्द होने की शिकायत है तो ये भी कम हो सकती है।

Advertisment

publive-image

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इन सुविधाओं के बदले ग्राहक को पहले की तुलना में 5% तक की अधिक कीमत भी चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि बीआइएस सर्टिफिकेट लेने के लिए निर्माताओं को कई गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा और इससे उनकी लागत बढ़ सकती है।

छोटे फुटवियर निर्माताओं को राहत

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो अभी सालाना 50 करोड़ रुपए से कम का कारोबार करने वाले फुटवियर निर्माताओं को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) के इस नियम से बाहर रखा गया है।

50 करोड़ रुपए से ज्‍यादा के सालाना टर्नओवर वाले फुटवियर निर्माताओं के पुराने स्टॉक पर यह नियम लागू नहीं होगा।

Advertisment

वे अपने पुराने स्टॉक की पूरी जानकारी BIS की साइट पर अपलोड करेंगे। अभी सरकार ने जून 2025 तक पुराने माल को बेचने की अनुमति दी है।

क्‍या होगा BIS सर्टिफिकेट से

इस सर्टिफिकेट से फुटवियर में यूज होने वाले कच्चे माल जैसे कि रेक्सिन, इनसोल, लाइनिंग की कमेकिल जांच सही तरीके से करनी होगी।

इसी के साथ ऊपरी भाग के मेटेरियल की टीयर स्ट्रेंथ और बेहतर लचीलापन की जांच में पास होना होगा।

Advertisment

इस सर्टिफिकेट को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य है कि उपभोक्ताओं को एक निश्चित गुणवत्ता का माल मिले और भारतीय फुटवियर उत्पादों की वैश्विक बाजार में भी ब्रांडिंग हो सके।

इससे निर्यात भी बढ़ेगा और जूते-चप्पलों की क्वालिटी पहले से बेहतर हो जाएगी। अगर भारतीय फुटवियर की क्‍वालिटी बेहतर होगी तो इनका नाम दुनिया में अच्‍छा होगा।

BIS के लाइसेंस में है लाखों का खर्चा

फुटवियर बनाने वाली कंपनियों और निर्माताओं की मानें तो BIS नियम के पालन के लिए उन्हें 6-8 लाइसेंस लेने पड़ते हैं। इन प्रत्‍येक लाइसेंस पर 2-3 लाख रुपए खर्च होते हैं।

Advertisment

फुटवियर सेक्टर में सैकड़ों से अधिक निर्माता 50 करोड़ से कम टर्नओवर वाले हैं। अभी इन पर ये नियम लागू नहीं होगा।

इन सभी निर्माताओं पर यह नियम लागू होने के बाद ही पूर्ण रूप से गुणवत्ता वाले फुटवियर मार्केट में बिकेंगे। वाणिज्य मंत्रालय की मानें तो कुछ समय बाद छोटे निर्माताओं पर भी ये नियम लागू कर दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें- Paris Olympics में AI मचा रहा धमाल: एक्टिविटी ट्रैकर से लेकर साइबर क्राइम तक में हो रहा यूज, जानें इसकी पूरी डिटेल

Advertisment
चैनल से जुड़ें