Firecrackers Ban: दिवाली पर खराब हो सकती है दिल्ली की आवोहवा, रिपोर्ट में हुआ चौकाने वाला खुलासा

Firecrackers Ban: दिवाली पर खराब हो सकती है दिल्ली की आवोहवा, रिपोर्ट में हुआ चौकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में दिवाली के मौके पर घरों में पटाखे जलाने का प्रतिशत पांच साल में सबसे ज्यादा हो सकता है, क्योंकि हर पांच में से दो परिवारों के इस गतिविधि में शामिल होने की संभावना है। एक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई है। लोकल सर्किल द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 10 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वह दिल्ली में दुकानों से पहले ही पटाखे खरीद चुके हैं, जबकि 20 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने एनसीआर के अन्य शहरों से पटाखे खरीदे हैं, यह दर्शाता है कि ऐसी वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है।

सर्वेक्षण को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के सभी जिलों के निवासियों से 10,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं। उत्तरदाताओं में 79 प्रतिशत पुरुष थे, जबकि 31 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। सर्वेक्षण के मुताबिक, ”61 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वह कोई पटाखे नहीं जलाएंगे। उनका मानना है कि पटाखे प्रदूषण का कारण बनते हैं और वह लोग प्रतिबंध का पालन कर रहे हैं। सर्वेक्षण के परिणाम की तुलना करने पर पता चला कि पटाखे जलाने वाले परिवारों का प्रतिशत 2018 के बाद से पांच साल की अवधि में इस वर्ष सर्वाधिक होने की संभावना है।”

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, ”2018 में 32 प्रतिशत ऐसे परिवारों के मुकाबले, 2019 में प्रतिशत बढ़कर 35 हो गया, लेकिन 2021 में कोविड की दूसरी लहर के बाद यह गिरकर 32 फीसदी हो गया था। इस साल उत्सव के मद्देनज़र और एनसीआर के नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में पटाखों पर कोई प्रतिबंध नहीं होने के कारण 39 फीसदी परिवार दिल्ली-एनसीआर में पटाखे जलाने की योजना बना रहे हैं।” दिल्ली सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि शहर में पटाखों का निर्माण, भंडारण या बिक्री करने पर विस्फोटक अधिनियम की धारा 9बी के तहत तीन साल की जेल और 5,000 रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बुधवार को कहा कि दिवाली पर शहर में पटाखे जलाने पर छह महीने तक की जेल और 200 रुपये का जुर्माना हो सकता है। दिल्ली सरकार ने सितंबर में एक आदेश जारी करके अगले साल एक जनवरी तक सभी प्रकार के पटाखों के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर फिर से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। पिछले दो साल से इस तरह का प्रतिबंध जारी है।

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