Farmers protest: पहले भी हिंसा की वजह से बीच में खत्म हो चुके हैं किसान आंदोलन, जानिए कब-कब हुआ ऐसा

Farmers protest: पहले भी हिंसा की वजह से बीच में खत्म हो चुके हैं किसान आंदोलन, जानिए कब-कब हुआ ऐसाFarmers protest: In the past, due to violence, the farmers movement has ended in the middle, know when and how it happened

Farmers protest: पहले भी हिंसा की वजह से बीच में खत्म हो चुके हैं किसान आंदोलन, जानिए कब-कब हुआ ऐसा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर देश में किसान 26 नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन 72 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में कुछ किसान संगठनों ने आंदोलन के आड़ में जिस प्रकार से हिंसा को अंजाम दिया, उसे देख कर नहीं लगता कि ये देश के किसान हैं। ऐसे में आज हम आपको पूर्व में हुए कुछ किसान आंदोलनों के बारे में बताएंगे। जो हिंसा के कारण अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सके थे।

करमूखेड़ी आंदोलन
देश में किसान आंदोलन कई हुए। लेकिन ज्यादातर आंदोलन हिंसा के कारण खत्म हो गए। इसमे पहले नंबर पर है 1987 में हुए करमूखेड़ी आंदोलन (Karamukhedi Movement) । इस आंदोलन की शुरूआत 1 मार्च 1987 को भारतीय किसान यूनियन (Indian Farmer's Union) ने शामली से की थी। किसानों ने इस आंदोलन को बिजली की बढ़ी हुई दरों के खिलाफ किया था। लेकिन इस दौरान हुए हिंसा में एक पुलिस का जवान शहीद हो गया और कई सरकारी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से दो किसानों की मौत हो गई थी। हिंसा इतना बढ़ गया था कि अंत में किसानों ने आंदोलन को खत्म कर दिया।

मार्च 1988 का किसान आंदोलन
6 मार्च 1988 को भारतीय किसान यूनियन ने पुलिस द्वारा मारे गए पांच किसानों के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए, किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन किया था। उस वक्त ये आंदोलन करीब 110 दिन तक चला था। किसानों ने इस आंदोलन में जेल भरो का नारा भी दिया था। लेकिन इस आंदोलन ने भी अपना मकसद पूरा किए बिना ही खत्म हो गया।

अक्टूबर 1988 का किसान आंदोलन
मार्च में हुए आंदोलन के बाद महेंद्र सिंह टिकैत ने एक बार फिर से अक्टूबर 1988 में एक आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में 14 राज्यों से लाखों किसान शामिल थे। इन किसानों ने दिल्ली में वोट कल्ब को अपने कब्जे में कर लिया था। लेकिन जैसे ही पुलिस ने वोट क्लब को घेरा तो आंदोलनकारियों की पुलिस से भिंड़त हो गई। पुलिस ने किसानों पर जबरदस्त लाठी चार्ज कर दिया। झड़प में एक किसान की मौत हो गई। बाद किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने इस आंदोलन को खत्म करने का एलान कर दिया।

सफल भी हुए हैं आंदोलन
ऐसा नहीं है कि हर बार हिंसा के कारण ही किसान आंदोलन खत्म हुए हैं। साल 1989 में अलीगढ़ में पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ कई किसान संगठन एकजुट हुए थे। लेकिन सभी किसानों के बीच इस मसले पर एकजुटता नहीं बन पा रही थी। अंतत: किसानों ने आपसी समझौते से इस किसान आंदोलन को खत्म करने का फैसला किया था। वहीं अगस्त 1989 में मुजफ्फरनगर में हुए किसान आंदोलन में किसानों की जीत हुई थी। इस आंदोलन को इतिहास का सबसे सफल आंदोलन माना जाता है। जिसमें पहली बार किसी राज्य के मंत्री ने आंदोलनस्थल पर पहुंच कर मांगों को मानने की घोषणा की थी।

साल 2018 का आंदोलन
इस आंदोलन को महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे नरेंश टिकैत (Naresh Tikait) ने नेतृत्व दिया था। जिसमें किसान दिल्ली कूच करने की तैयारी में थे। लेकिन वे दिल्ली पहुंचते उससे पहले ही उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद किसान उग्र हो गए। इस आंदोलन में भी हिंसा ने जन्म ले लिया और आंदोलन को वहीं खत्म करना पड़ा।

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