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हाइलाइट्स
भिंड में 20 से ज्यादा गांवों में तैयार हो रहा नकली दूध
एमपी के कई जिलों में हो रही नकली दूध की सप्लाई
दूध में डिटर्जेंट, रिफाइंड तेल और केमिकल का हो रहा उपयोग
Fake Synthetic Milk: एमपी के बाजारों में नकली सिंथेटिक दूध का करोबार जमकर हो रहा है. भिंड से रोजाना 2 लाख लीटर नकली दूध की सप्लाई प्रदेश में हो रही है. इस दूध में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले कई हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं. भिंड में खाद्य विभाग ने इस दूध के कुछ सैंपल लिए हैं. हालांकि अभी भी ये सेंथेटिक दूध लोगों के घरों तक पहुंच रहा है. जिले के 20 से ज्यादा गांवों में रोजाना 2 लाख लीटर नकली दूध हो रहा है.
अकेले भिंड में 6 लाख लीटर की खपत
भिंड जिले में रोजाना दूध की खपत करीब 6.25 लाख लीटर है. यहां 80 हजार लीटर से ज्यादा नकली दूध खपाया जाता है. ऐसे में जिले में ही करीब 80 हजार किग्रा लीटर मिलावटी दूध रोजाना खपाया जा रहा है. डॉक्टरों ने इस दूध को बेहद खतरनाक बताया है. इसमें कई घातक केमिकल हैं. जिससे आंत का कैंसर, लिवर और किडनी खराब होने का खतरा बताया है. पिछले दिनों ग्वालियर प्रशासन ने भी बड़ी मात्रा में मावा जब्त किया था.
डेयरीवाले ऐसे बनाते हैं नकली दूध
शुद्ध से क्रीम निकालने के बाद बचे दूध में पानी मिलाया जाता है. इसके बाद इसे सफेद करने के लिए डिटर्जेंट मिलाया जाता है. दूध में वसा बढ़ाने के लिए रिफाइंड तेल मिलाया जाता है. मिठास के लिए ग्लूकोज पाउडर मिलाते हैं. फैट बढ़ाने के लिए नाइट्रॉक्स नाम के केमिकल को उपयोग किया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को मशीन से अच्छी तरह मिलाकर पैक कर दिया जाता है.
10 से 15 रुपए में 1 लीटर नकली दूध बनता है
ग्रामीण इलाकों से डेयरी पर 35 से 40 रुपये लीटर के भाव में दूध बिकता है. इस दूध को बनाने में केवल 10 से 15 रुपए का खर्च आता है. सिंथेटिक दूध बनाने का खर्च बमुश्किल 10-15 रुपये आता है. इस तरह डेयरियों से टैंकरों में भरकर दूध को प्रदेशभर के कई जिलों में भेजा जाता है. इसे प्रतिलीटर डेयरी वाले 25 रुपए कमाते हैं. इस तरह से 2 लाख लीटर नकली दूध से रोजाना 50 लाख रुपये का मुनाफा होता है.
यहां बनता है नकली दूध
भिंड में कृष्णा टॉकीज के पास, अटेर रोड, चरथर, नुन्हाटा, जामना, बाराकलां, रेलवे स्टेशन के पास, उदोतपुरा, मुरलीपुरा, जावसा, मसूरी, बवेड़ी, दबोह एवं ग्वालियर रोड पर कई जगह तैयार होता है. अटेर में विजयगढ़, बगुली, इंगुरी, नरसिंहगढ़, पावई, सियावली, पारा, बड़पुरा, रिदौली, निवारी, चौम्हों, कनेरा, ऐंतहार रोड पर तैयार होता है. फूफ में भदाकुर रोड, अटेर रोड, सुरपुरा, कोषण, बरही, चांसड़ में बनता है। दबोह में बरथरा, कसल, रुरई, देवरी, विश्नपुरा सहित 10 गांवों में नकली दूध मावा बनता है. गोहद के बिरखड़ी, जैतपुरा, भगवासा आदि गांवों में नकली दूध और मावा बनाया जाता है। मेहगांव के नुन्हाड़, बीसलपुरा सहित एक दर्जन गांवों में नकली दूध और मावा का कारोबार हो रहा है. गोरमी में सुनारपुरा, प्रतापपुरा सहित आधा दर्जन स्थानों पर नकली दूध बनाया जा रहा है.
आगरा भी होता है सप्लाई
भिंड के दूध और मावा की डिमांड आगरा उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली में भी है. यहां से हजारों लीटर दूध दिल्ली, आगरा जाता है. यहां नकली दूध के जरिए घी तैयार कर देशभर में भेजा जाता है. मावा का उपयोग इन शहरों में स्थानीय स्तर पर खपाने के लिए किया जाता है. ।
नकली दूध से ये नुकसान
नकली और मिलावटी दूध से पेट संबंधी बीमारियां होती हैं. मिलावटी दूध से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है. लिवर-किडनी खराब हो सकती हैं. हार्ट अटैक के खतरे बढ़ते हैं. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है. आंखों पर केमिकल का बुरा असर होता है.
ऐसे पहचानें असली नकली दूध
स्वाद से भी असली दूध की पहचान हो सकती है. इसका स्वाद हलका मीठा होता. साथ ही इसमें सूंघकर देखिने पर मीठेपन की खुशबू आएगी. यदि इसमें साबुन या डिटरजेंट जैसी महक आ रही है तो ये मिलावट वाला दूध है. दूध का रंग दूधिया सफेद होता है जिसे उबालने और स्टोर करने के बाद भी उसका रंग दूधिया सफेद ही रहता है. मिलावटी वाला दूध स्टोर करने के कुछ ही घंटों में पीला दिखने लगता है. इसे उबालने के बाद स्टोर किया जाए तो भी इसका दूधिया रंग पीले रंग में बदल जाएगा. दरअसल ये पीलापन यूरिया से होता है. इसके अलावा एक चम्मच के करीब दूध किसी कांच की बोतल में डालने पर उसे हिलाने से अगर दूध में झाग उठता है और काफी देर बाद वो झाग बैठता है तो समझिए कि दूध में डिटरजेंट मिला हुआ है.
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