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Bilaspur High Court: पूर्व विधायक की पत्‍नी ने पेंशन नियम को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिव से मांगा जवाब

Bilaspur High Court: पूर्व विधायक की पत्‍नी ने पेंशन नियम को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिव से मांगा जवाब

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Sanjeet Kumar
Bilaspur High Court

Bilaspur High Court

Bilaspur High Court: छत्‍तीसगढ़ में विधवा पेंशन वाला एक पैचीदा मामला सामने आया है। यह मामला पूर्व और दिवंगत विधायक की पत्‍नी की पेंशन का मामला है। जहां पूर्व दिवंगत विधायक मिश्रीलाल खत्री की विधवा पत्नी को राज्‍य सरकार ने पेंशन देने से मना कर दिया है। इस पर पत्‍नी ने हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) में याचिका दायर की है। साथ ही पेंशन नियम को चुनौती भी दी है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिव को नोटिस भेजा है, साथ ही इस मामले में जवाब भी मांगा है।

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पूर्व विधायक का 1996 में हुआ निधन

मालूम हो कि मिश्रीलाल खत्री संजारी बालोद विधानसभा सीट (Bilaspur High Court) से विधायक थे। यह विधानसभा अब परिसीमन के बाद विलोपित हो गई है। यहां से विधायक रहे खत्री का साल 1996 में निधन हो गया। इसके बाद राज्य सरकार के द्वारा नियमों का हवाला देकर पूर्व विधायक पेंशन को बंद कर दिया है। इस पर पत्‍नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

पेंशन नियमों को हाईकोर्ट में दी चुनौती

दिवंगत पूर्व विधायक (Bilaspur High Court) की पत्‍नी पुष्पा देवी खत्री ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इस याचिका में अपने पति के निधन के बाद पेंशन की मांग की है। याचिका में छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन तथा पेंशन नियम के नियम 3 घ की संवैधानिक वैधता को चेलेंज किया है। याचिकाकर्ता की ओर से उनके वकील ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन तथा पेंशन अधिनियम 1972 की धारा 6 ख के अनुसार पूर्व विधायक की मृत्यु दिनांक से पूर्व विधायक के कुटुंब सदस्य पेंशन प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे।

नियम 3 घ मूल अधिनियम छत्तीसगढ़ (Bilaspur High Court) विधानसभा सदस्य वेतन तथा पेंशन अधिनियम 1972 के धारा 6 ख के विपरीत है। जो कि मूल अधिनियम के प्रावधान का स्पष्ट उल्लंघन करता है। याचिका में यह भी जानकारी दी कि कार्यपालिका द्वारा बनाया कोई भी नियम मूल अधिनियम के प्रावधान का उल्लंघन नहीं कर सकते। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन और विधानसभा के सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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मध्‍य प्रदेश विधानसभा में रहे विधायक

बता दें कि मध्‍य प्रदेश से छत्‍तीसगढ़ (Bilaspur High Court) 2000 में अलग हुआ और नया राज्‍य बना। जबकि मिश्रीलाल खत्री साल 1977 से 1979 तक विधायक रहे थे। जिन्‍हें पेंशन मिल रही थी। 1996 में उनका निधन हो गया।

आवेदन को किया खारिज

याचिकाकर्ता ने जानकारी दी कि दिवंगत पूर्व विधायक (Bilaspur High Court) की पत्नी ने कुटुंब पेंशन के लिए राज्य शासन और छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिव के पास आवेदन प्रस्‍तुत किया था। इस आवेदन को खारिज कर दिया गया था।

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सचिव ने लिखा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन और पेंशन नियम 2006 के नियम 3 घ के अनुसार कुटुंब पेंशन के नियम के अनुरूप केवल उन प्रकरणों में प्रदान पेंशन दी जाएगी, जिसमें सदस्‍य की मृत्‍यु 2005 के बाद हुई हो। इस आवेदन के अनुसार पूर्व विधायक मिस्री लाल खत्री का निधन 1996 में हुआ है। ऐसे में इस नियम के अनुसार उनकी विधवा पत्नी को पेंशन देने का प्रावधान खत्‍म हो जाता है।

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