पूर्वी लद्दाख गतिरोध : भारत और चीन ने राजनयिक और सैन्य स्तर पर विचार-विमर्श करते रहने पर सहमति जताई

नयी दिल्ली, 18 दिसंबर (भाषा) भारत और चीन ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के घटनाक्रमों की समीक्षा की और एलएसी पर टकराव वाले सभी बिंदुओं से जल्द से जल्द सैनिकों की पूरी तरह वापसी तथा राजनयिक और सैन्य स्तर पर विचार-विमर्श करते रहने पर सहमति जताई ।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘‘ दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अगले (नौवें) दौर के वरिष्ठ कमांडरों की बैठक जल्द ही किसी तारीख पर होनी चाहिए ताकि दोनों पक्ष वर्तमान समझौतों एवं प्रोटोकाल के अनुरूप एलएसी पर सैनिकों के पूर्ण रूप से पीछे हटाने और शांति स्थापित करने की दिशा में काम कर सकें । ’’

पूर्वी लद्दाख गतिरोध पर चीन के साथ बातचीत के संदर्भ में विदेश मंत्रालय ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर टकराव वाले सभी बिंदुओं से जल्द से जल्द सैनिकों की पूरी तरह वापसी की दिशा में काम करते रहने की सहमति बनी।

सीमा गतिरोध पर चीन के साथ हुई राजनयिक स्तर की वार्ता पर मंत्रालय ने कहा, ‘‘ दोनों पक्षों ने इस बात का संज्ञान लिया कि सैन्य वार्ता के सातवें और आठवें दौर से स्थिरता लाने में मदद मिली । ’’

मंत्रालय के बयान के अनुसार, शुक्रवार 18 दिसंबर को भारत चीन सीमा मामलों पर विचार विमर्श एवं समन्वय पर कार्यकारी तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की डिजिटल माध्यम से 20वीं बैठक हुई ।

इस बैठक में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) कर रहे थे जबकि चीनी शिष्टमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा एवं समुद्र मामलों के विभाग के महासचिव कर रहे थे । डब्ल्यूएमसीसी की पिछली बैठक 30 सितंबर को हुई थी ।

मंत्रालय के अनुसार, भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के घटनाक्रमों की समीक्षा की है । दोनों पक्षों ने इस बात का संज्ञान लिया कि सातवें और आठवें दौर की वरिष्ठ कमांडरों की बैठक से जमीनी स्तर पर स्थिरता लाने में मदद मिली ।

उल्लेखनीय है कि सातवें और आठवें दौर की वरिष्ठ कमांडरों की बैठक क्रमश: 12 अक्तूबर और छह नवंबर 2020 को हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘ दोनों पक्षों ने राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर विचार विमर्श जारी रखने पर सहमति जतायी । ’’

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में शून्य से नीचे तापमान वाले पूर्वी लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्र में करीब 50 हजार भारतीय सैनिक पूरी तरह से तैयार स्थिति में तैनात हैं । दोनों देशों के बीच गतिरोध को समाप्त करने को लेकर बातचीत का अभी कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है ।

इससे पहले विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जतायी थी कि चीन के साथ आगे बातचीत से दोनों पक्षों को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सभी संघर्ष वाले इलाकों से पूर्ण रूप से पीछे हटने के लिये परस्पर रूप से स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने में मदद मिलेगी ।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता में बताया था कि दोनों पक्ष राजनयिक एवं सैन्य माध्यमों के जरिये सम्पर्क बनाये हुए हैं और इन चर्चाओं के माध्यम से दोनों पक्षों को एक दूसरे के रूख के बारे में समझ बढ़ाने में मदद मिली है।

भाषा दीपक दीपक उमा

उमा

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