E-Rickshaw: आपको घर के दरवाजे तक पहुंचने वाला ई-रिक्शा, क्या आप जानते हैं इसे किसने बनाया और क्या है इसका भविष्य?

E-Rickshaw: सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा का विचार भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर डॉ. अनिल राजवंशी के दिमाग की उपज है।

E-Rickshaw

E-Rickshaw: सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा (Electric Rickshaw) आज पर्यावरण के अनुकूल और किफायती परिवहन का प्रतीक बन गए हैं। ये रिक्शा न केवल सस्ते और ईको-फ्रेंडली हैं, बल्कि प्रदूषण और शोर रहित भी हैं।

शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय हो रहे इन ई-रिक्शा ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भारत में पहला ई-रिक्शा (E-Rickshaw) किसने बनाया और इसकी शुरुआत कब हुई?  

सन् 2000 में बना पहला ई-रिक्शा 

ई-रिक्शा (E-Rickshaw) का विचार भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर डॉ. अनिल राजवंशी (Anil Rajvanshi) के दिमाग की उपज है। IIT कानपुर के छात्र रह चुके डॉ. राजवंशी ने 1995 में महाराष्ट्र के फाल्टन में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया।

पांच साल की मेहनत के बाद 2000 में उन्होंने पहला ई-रिक्शा प्रोटोटाइप तैयार किया। इस प्रोटोटाइप ने दुनिया भर में एक नई शुरुआत की। कई कंपनियों ने उनके मॉडल को कॉपी किया और अपनी जरूरतों के मुताबिक इसमें सुधार भी किए।

पर्यावरण अनुकूल तकनीकों पर किया काम

डॉ. राजवंशी ने अमेरिका के फ्लोरिडा से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1981 में भारत लौटने का फैसला किया। उनके इस निर्णय को उनके पिता ने चुनौती दी, लेकिन उनकी पत्नी ने हमेशा उनका साथ दिया।

डॉ. राजवंशी न केवल ई-रिक्शा के निर्माण में सफल हुए, बल्कि उन्होंने कई अन्य पर्यावरण अनुकूल तकनीकों पर भी काम किया, जिनमें एल्कोहल पर आधारित स्वच्छ कुकिंग स्टोव प्रमुख है।  

लोगों के परिवहन में आई क्रांति 

पारंपरिक रिक्शा और टेम्पो की तुलना में ई-रिक्शा अधिक पर्यावरण के अनुकूल और किफायती हैं। ये न केवल ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करते हैं, बल्कि इनके रखरखाव और संचालन का खर्च भी कम है। ई-रिक्शा के आने से छोटे शहरों और कस्बों के लोगों को सस्ती और सुगम यात्रा सुविधा मिली है।  

प्रदूषण कम करने में अहम भूमिका 

ई-रिक्शा का उद्देश्य केवल सस्ती परिवहन सेवा प्रदान करना नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण और शहरी ट्रैफिक की समस्याओं को हल करना भी है। इनकी बढ़ती लोकप्रियता ने प्रदूषण की समस्या से जूझते देशों के लिए नई उम्मीद जगाई है। सरकार भी ई-रिक्शा को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और विभिन्न योजनाएं ला रही है।  

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ई-रिक्शा का भविष्य 

भारत में ई-रिक्शा का बढ़ता उपयोग न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि इसे रोजगार का बड़ा स्रोत भी बना रहा है। बैटरी-चालित इस साधन को चलाने में पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं होती, जिससे चालकों का खर्च कम हो जाता है। साथ ही, भविष्य में सोलर पैनल से चार्ज होने वाले ई-रिक्शा की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।

ई-रिक्शा ने परिवहन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। डॉ. अनिल राजवंशी का यह इनोवेशन न केवल पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बना, बल्कि भारत के लाखों लोगों के लिए सस्ता और सुगम परिवहन साधन भी। इस इनोवेशन ने भारत को प्रदूषण मुक्त परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है।

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