कोरोना काल में लोगों की तकलीफें, स्वास्थ्य कर्मियों के बलिदान याद कर भावुक हुए मोदी

नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) कोविड-19 के खिलाफ देशव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत करने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उस वक्त भावुक हो गए जब अपने संबोधन के दौरान उन्होंने इस संक्रमण काल में लोगों को हुई तकलीफों, स्वास्थ्य कर्मियों व अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों के बलिदानों और अपने प्रियजनों की अंतिम विदाई तक में शामिल ना हो पाने के उनके दर्द का जिक्र किया।

टीकाकरण अभियान की शुरुआत से पहले राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सामान्य तौर पर बीमारी में पूरा परिवार बीमार व्‍यक्‍ति की देखभाल के लिए जुट जाता है लेकिन इस बीमारी ने तो बीमार को ही अकेला कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘अनेकों जगहों पर छोटे-छोटे बीमार बच्चों को मां से दूर रहना पड़ा। मां परेशान रहती थी… मां रोती थी… लेकिन चाहकर भी कुछ कर नहीं पाती थी… बच्चे को अपनी गोद में नहीं ले पाती थी।’’

उन्होंने कहा कहीं बुजुर्ग पिता, अस्पताल में अकेले अपनी बीमारी से संघर्ष करने को मजबूर थे और संतान चाहकर भी उसके पास नहीं जा पाती थी।

उन्होंने कहा, ‘‘जो हमें छोड़कर चले गए उनको परंपरा के मुताबिक वो विदाई भी नहीं मिल सकी जिसके वो हकदार थे। जितना हम उस समय के बारे में सोचते हैं, मन सिहर जाता है, उदास हो जाता है।’’

यह कहते-कहते प्रधानमंत्री भावुक हो गए।

उन्होंने रूंधे गले से कहा कि निराशा के उस वातावरण में चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, अग्रिम मोर्चे पर तैनात अन्य कर्मी और एंबुलेंस ड्राइवरों ने आशा का भी संचार किया और लोगों की जान बचाने के लिए अपने प्राणों को संकट में डाला।

मोदी ने कहा, ‘‘उन्होंने मानवता के प्रति अपने दायित्व को प्राथमिकता दी। इनमें से अधिकांश तब अपने बच्चों, अपने परिवार से दूर रहे और कई-कई दिन तक घर नहीं गए। सैकड़ों साथी ऐसे भी हैं जो कभी घर वापस लौट ही नहीं पाए, उन्होंने एक-एक जीवन को बचाने के लिए अपना जीवन आहूत कर दिया।’’

उन्होंने कहा इसलिए आज कोरोना वायरस का पहला टीका स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को लगाकर समाज अपना ऋण चुका रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ये टीका उन सभी साथियों के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की आदरांजलि भी है।’’

ज्ञात हो कि टीकाकरण के पहले चरण के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 3,006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। पहले दिन तीन लाख से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 के टीके की खुराक दी जाएगी।

सरकार के मुताबिक, सबसे पहले एक करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले करीब दो करोड़ कर्मियों और फिर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को टीके की खुराक दी जाएगी। बाद के चरण में गंभीर रूप से बीमार 50 साल से कम उम्र के लोगों का टीकाकरण होगा।

स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च सरकार वहन करेगी।

मोदी ने कोविड-19 के खिलाफ भारत के टीकाकरण अभियान को विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बताते हुए कहा कि यह भारत के सामर्थ्य को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया। यह अभियान इतना बड़ा है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि दुनिया के लगभग 100 देशों की आबादी तीन करोड़ से कम है और भारत पहले ही चरण में 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के ‘मेड इन इंडिया’ टीकों की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त होने के बाद ही इसके उपयोग की अनुमति दी गई है।

उन्होंने कहा कि टीके की दो खुराक लेनी बहुत जरूरी हैं और इन दोनों के बीच लगभग एक महीने का अंतर होना चाहिए।

उन्होंने टीका लेने के बाद भी लोगों से कोरोना वायरस की रोकथाम संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया और ‘‘दवाई भी, कड़ाई भी’’ का मंत्र दिया।

भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र वैभव

वैभव

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