दुर्ग चाकूबाजी हत्याकांड: कोर्ट ने दो भाइयों को सुनाई उम्रकैद, एक अन्य को सात साल की सजा, जानें पूरा मामला

Durg Chaaku Hatyakand; दुर्ग के बजरंग नगर में गजेंद्र विश्वकर्मा की हत्या के मामले में कोर्ट ने दो सगे भाइयों राकेश और अजय साहू को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

Durg Chaaku Hatyakand

हाइलाइट्स 

  • हत्या के मामले में उम्रकैद

  • कोर्ट ने सुनाया कठोर फैसला

  • चश्मदीद गवाही बनी आधार

Durg Chaaku Hatyakand: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 2023 में हुए एक सनसनीखेज चाकूबाजी हत्याकांड में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार कोशले की अदालत ने आरोपियों राकेश साहू और अजय साहू को गजेंद्र विश्वकर्मा की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 500 रुपये का अर्थदंड लगाया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने रमेश विश्वकर्मा पर जानलेवा हमला करने के मामले में भी दोनों भाइयों को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस हत्याकांड में तीसरे आरोपी घनश्याम साहू, जो दोनों दोषियों के बड़े भाई थे, की मृत्यु पिछले वर्ष हो चुकी है, जिससे उनके खिलाफ मामला स्वतः ही बंद कर दिया गया।

19 फरवरी 2023 की रात हुई थी घटना

इस मामले ने पूरे दुर्ग शहर को झकझोर दिया था। घटना बजरंग नगर, कंडरा पारा इलाके की है, जहां 19 फरवरी 2023 की रात को रंजिश के चलते गजेंद्र विश्वकर्मा पर चाकुओं से हमला किया गया। पीड़ित की मां दुरपति विश्वकर्मा ने FIR में बताया कि उनका छोटा बेटा रमेश दौड़ते हुए घर आया और बताया कि पड़ोस के राकेश, अजय और घनश्याम गजेंद्र को पीट रहे हैं।

जब वह मौके पर पहुंचीं तो देखा कि राकेश और घनश्याम ने गजेंद्र को पकड़ रखा था, और अजय ताबड़तोड़ चाकू से उसके पेट, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर वार कर रहा था। रमेश ने जब अपने भाई को बचाने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया और फिर तीनों मौके से फरार हो गए।

इलाज के दौरान गजेंद्र की मौत

हमले के बाद दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गजेंद्र विश्वकर्मा ने दम तोड़ दिया, जबकि रमेश को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। इस जघन्य वारदात से इलाके में सदमे और आक्रोश की लहर दौड़ गई थी।

जांच का जिम्मा देवादास भारती को सौंपा गया, जिन्होंने चश्मदीदों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एक मजबूत केस तैयार किया। आरोपियों और पीड़ित परिवार के बीच पहले से तनाव की पुष्टि हुई, जो अंततः इस हत्या का कारण बना।

कोर्ट ने नहीं मानी बचाव पक्ष की दलीलें

इस पूरे मामले में अतिरिक्त लोक अभियोजक नंदनी चंद्रवंशी की ओर से की गई प्रभावशाली पैरवी ने केस को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाया। अभियोजन पक्ष ने घटना के चश्मदीद गवाह, पुलिस जांच, और मेडिकल प्रमाणों को प्रस्तुत कर आरोपियों की संलिप्तता को अदालत में सिद्ध किया।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दोनों भाइयों को बेकसूर बताते हुए सबूतों को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन ठोस साक्ष्यों की अनुपस्थिति में उनके तर्क अदालत ने खारिज कर दिए। अंततः कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा का ऐलान किया।

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न्याय की उम्मीद बनी यह सजा

इस हत्याकांड में आए फैसले को लेकर स्थानीय समाज में संतोष और विश्वास की भावना देखी जा रही है। लोग इसे एक न्यायप्रिय निर्णय मान रहे हैं, जो यह संदेश देता है कि अपराध करने वालों को कानून से कोई बचा नहीं सकता।

यह निर्णय न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए राहत भरा है, बल्कि समाज में अपराध के खिलाफ एक सख्त संदेश भी देता है। इस फैसले के बाद से स्थानीय लोग कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में एक बार फिर विश्वास जताते नजर आ रहे हैं।

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