Diwali 2025 Unique Traditions : गोवा से बंगाल तक हर राज्य की अपनी दिवाली! जानिए किस जगह कैसे मनाते हैं रोशनी का पर्व ?

Diwali 2025 Unique Traditions; दिवाली 2025 पर भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे निभाई जाती हैं अनोखी परंपराएं? जानिए गोवा, पंजाब, बंगाल, गुजरात समेत कई राज्यों की खास मान्यताएं।

Diwali 2025 Unique Traditions

जानें राज्यों की खास दिवाली मान्यताएं

Diwali 2025 Unique Traditions : दिवाली यानी रौशनी, उल्लास और आस्था का पर्व। हर साल जब ये त्योहार आता है, तो सिर्फ घरों में ही नहीं, दिलों में भी उजाला भर जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दिवाली को हम लक्ष्मी पूजा, पटाखों और मिठाइयों के त्योहार के रूप में जानते हैं, वो देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से क्यों और कैसे मनाई जाती है ?

दिवाली के रीति-रिवाज सिर्फ एक धर्म या एक परंपरा से नहीं जुड़े हैं, बल्कि यह विविधताओं से भरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर का आइना भी है। इस बार 2025 में दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी, और इस मौके पर देशभर में कुछ ऐसी परंपराएं निभाई जाएंगी, जो शायद आपने पहले कभी न देखी हों।

गोवा: राम नहीं, श्रीकृष्ण बनते हैं दिवाली के नायक

गोवा में दिवाली का संबंध भगवान राम से नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण और नरकासुर वध की कथा से है। यहां नरक चतुर्दशी के दिन नरकासुर का विशाल पुतला जलाया जाता है, जो प्रतीक होता है बुराई पर अच्छाई की जीत का। लोग अपने शरीर पर नारियल तेल लगाकर स्नान करते हैं, जिससे पापों का नाश और आत्मा की शुद्धि मानी जाती है। यह परंपरा वहां के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

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कर्नाटक: बाली प्रतिपदा के रूप में होती है दिवाली

कर्नाटक में दिवाली केवल रोशनी का नहीं, बल्कि राजा बाली के धरती पर आगमन का प्रतीक भी है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बाली को पाताल लोक भेज दिया था, लेकिन उसे साल में एक दिन धरती पर आने की अनुमति दी। यह दिन 'बाली प्रतिपदा' के नाम से खास तौर पर किसानों द्वारा बड़े उल्लास से मनाया जाता है, और इसे समर्पण, विश्वास और भूमि से जुड़ाव का पर्व माना जाता है।

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पंजाब: बंदी छोड़ दिवस, जहां आजादी की होती है पूजा

पंजाब में दिवाली केवल लक्ष्मी पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी की उस घटना की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने मुगलों की कैद से 52 राजाओं को मुक्त कराया था। गुरुद्वारों में दीयों की रौशनी से सजावट की जाती है और श्रद्धालु एक-दूसरे को गिफ्ट देते हैं। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर इस दिन जगमगाता है, और देशभर से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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पश्चिम बंगाल: काली पूजा की रात है दिवाली

जब देशभर में लक्ष्मी पूजा होती है, तब पश्चिम बंगाल में मां काली की आराधना होती है। दिवाली की रात को यहां काली पूजा के पंडाल सजाए जाते हैं, जो दुर्गा पूजा की ही तरह भव्य और आकर्षक होते हैं। मां काली की पूजा कर बुराई, अहंकार और अज्ञानता के विनाश की कामना की जाती है। कोलकाता और बंगाल के अन्य हिस्सों में इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है।

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गुजरात: दिवाली नहीं, नए साल का स्वागत

गुजरात में दिवाली सिर्फ साल का अंत नहीं, बल्कि नए साल की शुरुआत होती है। यहां दिवाली के दूसरे दिन 'बेस्टु वरस' के नाम से गुजराती नववर्ष मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं, घरों में विशेष पकवान बनते हैं और व्यापारी अपने नए बही-खाते ('चोपड़ा पूजन') की शुरुआत इसी दिन करते हैं। यह परंपरा वहां के व्यवसायिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

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कहीं होती है सब्जियों की शादी, कहीं खेली जाती है मिट्टी की होली

देश के कुछ हिस्सों में दिवाली के दिन ‘सब्जियों की शादी’ की परंपरा भी निभाई जाती है। खासकर उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं परंपरागत गीत गाते हुए सब्जियों को सजाकर उनका विवाह कराती हैं- इसे प्रकृति और अन्न का सम्मान माना जाता है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में दिवाली के दौरान मिट्टी से बने खिलौनों की होली खेली जाती है, जिसमें बच्चे मिट्टी के बने सैनिकों को युद्ध के खेल में लगाते हैं।

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