Diwali 2022 : दीपावली के दीप का काजल लगाने का क्या है धार्मिक और वैज्ञानिक कारण, जानें काजल बनाने का तरीका

Diwali 2022 : दीपावली के दीप का काजल लगाने का क्या है धार्मिक और वैज्ञानिक कारण, जानें काजल बनाने का तरीका

नई दिल्ली। diwali 2022 आपने अलग—अलग त्योहारों पर अलग—अलग रीति—रिवाजों के diwali kajal बारे में तो सुना ही होगा। तो आपको बता दें दीपावली पर भी कुछ ऐसे ही रीति रिवाज चलन में है। कुछ लोक रीतियों के अनुसार दीपावली के दिन आंखों में काजल लगाने का चलन है। hindi news पर क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है। यदि नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इसे लेकर ज्योतिष क्या कहते हैं।

इस साल दीपावली का त्योहार 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। बेहद खास होने वाली है। वो इसलिए क्योंकि 24 अक्टूबर को शाम 4:44 अमावस तिथि आ रही है। इसके पहले तक चौदस रहेगी। 25 को सूर्य ग्रहण लग जाएगा। इसलिए इस बार की दीपावली पूजन में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

काजल लगाने का धार्मिक कारण —
बुरी नजर उतारने के लिए करना न भूलें ये उपाय —
आपको बता दें बड़े बुजुर्ग पहले के समय से एक उपाय करते आ रहे हैं। इस दिन नजर उतारने का उपाय बेहद खास माना जाता हैं। इस दिन घर के सभी सदस्यों को एक साथ बिठाकर राई, नमक और खड़ी लाल मिर्च से नजर उतारती हैं। लोक रीति अनुसार ये रिवाज प्रचयन में आ गया है। साथ ही ऐसा माना जाता है कि इस दिन काजल लगाने से साल भर कभी नेत्र रोग नहीं होते। साथ ही काजल लगाने से परिवार को बुरी नजर नहीं लगती है।

क्या है काजल लगाने का वैज्ञानिक कारण —
इसके अलावा कई वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि दिवाली के दिन होने वाले प्रदूषण से हमारी आंखों को बहुत नुकसान पहुंचता है इसलिए रात में दीपक से बने हुए काजल लगाने से आंखें शुद्ध हो जाती हैं। इन सभी कारणों की वजह से दिवाली की रात में काजल लगाने का विशेष महत्व होता है।

ऐसे बनाएं काजल —
दीपावली के दिन दीये का काजल बनाने के लिए एक बड़े दीपक में घी की बाती बनाकर उसे जलाएं। फिर पर एक मिट्टी का दीपक ढ़क दें। ध्यान रखें दीपक बुझे न। इसे कुछ देर रखा रहने के बाद इस पर से दीपक हटा दें। फिर इस पर उपर जमी कार्बन या धूल के कणों को एक कॉटन के कपड़े हल्का करके हटा दें। फिर बचे काजल को एक डिब्बी में रख लें। इसमें घी मिला कर मिक्स कर लें। इसे जब चाहें लगा सकते हैं।

घरों में इस मुहूर्त में करें पूजन —
शाम 6:53 से 8:49 तक

व्यापारियों के लिए पूजन ​मुहूर्त —
रात 1:21 से 3:25

दीपावली पूजन में रात में सोना माना जाता है वर्जित —
पंडित राम गोविंद शास्त्री के अनुसार दीपावली के दिन ऐसा माना जाता है कि रात को लक्ष्मी जी का आगमन होता है। इसलिए इस दिन सोना नहीं चाहिए। चूंकि इस दिन शाम को 4:44 से अमावस का त्योहार आ रहा है। इसलिए इस दिन व्यापारियों के लिए रात का मुहूर्त शुभ माना गया है।

चौघड़ियां के अनुसार दुकान के लिए पूजा मुहूर्त —
चर लग्न — शाम 6 —7:30
लाभ योग — रात 10:30 से 12

यहां जानें कब से कब तक कौन सी तिथि –

चतुर्दशी तिथि – 24 अक्टूबर, शाम 4ः44 बजे तक
अमावस्या तिथि यानि दीपावली – 24 अक्टूबर, शाम 4ः44 से

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