Diwali 2020: इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में होगी लक्ष्मी पूजा, जानें शुभ मूहूर्त और पूजा विधि

Diwali 2020: हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है और इस बार दिवाली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। पंडित जी के अनुसार इस बार लक्ष्मी कुबेर की पूजा स्थिर लग्न में होगी। दीपावली पर शनि स्वाति योग से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस योग में दिवाली की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।

14 नवंबर शनिवार को सुबह से लेकर रात 8:48 तक रहेगा। सर्वार्थसिद्धि योग बर रहा है। दिवाली र्वार्थसिद्धियोग के साथ ग्रहों की स्थिति भी बहुत उत्तम है। आइए जानते हैं दिवाली वाले दिन ग्रहों की स्थिति

इस दिन सुबह से ही शुक्र बुध की राशि कन्या में , शनिदेव स्वराशि मकर में ,राहु शुक्र की राशि वृष में तो केतु मंगल की राशि वृश्चिक में हैं। इस दिन सूर्य तुला राशि मे ,चंद्रमा शुक्र की राशि तुला में ,पराक्रम कारक ग्रह मंगल गुरु की राशि मीन में, बुध शुक्र की राशि तुला में हैं।

पंडित जी ने बताया कि इस प्रकार ग्रहों का योग 499 साल पहले 1521 में बना था। जिसके बाद अब बन रहा है। इसलिए इस बार दिवाली बहुत शुभ मानी जा रही है। दिवाली का पूजन स्थिर लग्न में करना अच्छा होता है। कहते हैं कि इस स्थिर लग्न में पूजन करने से माता लक्ष्मी आपके घर में ठहरती है। आइए जानते हैं लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

स्थिरलग्न में पूजन महूर्त

वृषभ लग्न में शाम 5:30 से 7:30 के मध्य
सिंह लग्न में रात 12:00 से 2:15 के मध्य

लक्ष्मी पूजा के लिए पूजन सामग्री

रोली, मौली, पान, सुपारी, अक्षत, धूप, घी का दीपक, तेल का दीपक, खील, बताशे, श्रीयंत्र, शंख , घंटी, चंदन, जलपात्र, कलश, लक्ष्मी-गणेश-सरस्वतीजी का चित्र, पंचामृत, गंगाजल, सिन्दूर, नैवेद्य, इत्र, जनेऊ, कमल का पुष्प, वस्त्र, कुमकुम, पुष्पमाला, फल, कर्पूर, नारियल, इलायची, दूर्वा।

लक्ष्मी पूजा विधि

1. दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं।

2. पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं। चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें।

3. माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें।

4. इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें।

5. महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें।

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