योगी के मंत्री का फरमान: विधायक के फोन करने पर कलेक्टर-SP को बोलना होगा जी सर, BJP नेताओं का नं. करना होगा सेव

UP Politics News: यूपी के मंत्रीजी का ऑर्डर कलेक्टर एसपी विधायक से फोन उठाने के साथ बोलेंग जी सर, मंडल अध्यक्षों का नंबर करना होगा सेव

योगी के मंत्री का फरमान: विधायक के फोन करने पर कलेक्टर-SP को बोलना होगा जी सर, BJP नेताओं का नं. करना होगा सेव

UP Politics News: यूपी के कुशीनगर में योगी सरकार के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने एक अनोखा फरमान जारी किया है। जिसमें उन्होंने साफ किया है कि डीएम और एसपी अब से किसी भी जनप्रतिनिधि यानी विधायक का फोन नजरअंदाज नहीं करेंगे। अगर विधायक किसी भी अधिकारी को फोन करते हैं, तो उन अधिकारियों को ‘जी सर’ कहकर जवाब देना पड़ेगा। मंत्री ने ये फरमान पदाधिकारियों के साथ बैठक में कहा। यूपी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने इस संबंध में डीएम और और एसपी समेत जनपद के तमाम बड़े अधिकारियों को ये आदेश दिया है।

बीजेपी मंडल अध्यक्षों के नंबर जिला अधिकारी अपने फोन में करें सेव

दिनेश प्रताप सिंह ने यहीं तक नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि कुशीनगर में BJP मण्डल अध्यक्ष के क्षेत्र में जितने भी थाना, तहसील, SDM, तहसीलदार आते हैं उन्हें अपने मोबाइल में मंडलअध्यक्ष का मोबाइल नंबर सेव करना होगा। अधिकारी किसी का फोन इग्नोर न करें। डीएम, एसपी, एडीएम के मोबाइल फोन में भी बीजेपी जिला संगठन के सभी पदाधिकारियों का नंबर सेव होगा। अगर भाजपा का कोई भी पदाधिकारी फोन करेगा तो उसे फोन उठाना पड़ेगा यही नहीं अधिकारियों को फोन उठाने के बाद भाई साहब! या 'जी सर' बोलना पड़ेगा।

कौन हैं दिनेश प्रताप सिंह

दिनेश प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में उद्यान विभाग के मंत्री है। इसके साथ ही उन्हें कुशीनगर जिले का प्रभारी मंत्री भी बनाया गया है। इसी सिलसिले में उन्होंने कुशीनगर स्थित बीजेपी कार्यालय में संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। जहां मंडल के सभी सांसद और विधायकों ने हिस्सा लिया था। इसी दौरान मंत्रीजी ने ये फरमान निकाला। अब आदेश की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हो रही है।

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विधायकों ने की थी अधिकारियों की शिकायत

बीजेपी की लोकसभा चुनाव में हार के बाद कई विधायकों और पदाधिकारियों ने अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगाया था, जिसके कारण पार्टी को चुनाव में नुकसान हुआ। अब यह आदेश अति महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इसमें अधिकारियों को विधायकों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया गया है।

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