Digital Drug Addiction: भोपाल में डिजिटल ड्रग के शिकार हुए 3 बच्चे, अपनी सुध भी भूले, जानें क्या है नशे का ये नया रूप ?

Digital Drug Addiction Bhopal: भारत में युवाओं के बीच डिजिटल ड्रग्स का नशा तेजी से बढ़ रहा है। 'डिजिटल कैनाबिस' और 'डिजिटल कोकेन' जैसे म्यूजिक बीट्स 15-25 साल के युवाओं को एडिक्ट बना रहे हैं। भोपाल में इसके तीन केस सामने आए हैं।

Digital Drug Addiction Bhopal

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हाइलाइट्स

  • नये नशे के रूप में सामने आया डिजिटल ड्रग
  • भोपाल में तीन केस मेडिकल कॉलेज पहुंचे
  • 8-10 घंटे डिजिटल म्यूजिक सुनने वाले हो रहे एडिक्ट

Digital Drug Addiction Bhopal: मध्यप्रदेश के भोपाल में यूं तो नशे की लत के कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अब डिजिटल ड्रग के तीन सनसनीखेज मामले सामने आए हैं। ये डिजिटल ड्रग बिना बोल वाले ट्रैक साउंड होते हैं, जिसकी धुन पर बच्चे और युवा फंसते ही जा रहे हैं। डिजिटल ड्रग के तीन केस गांधी मेडिकल कॉलेज में आए हैं।

15 से 25 साल के बच्चे-युवा शिकार

जानकार बताते हैं डिजिटल ड्रग का यह नशा 15 से 25 साल की उम्र के बच्चों और युवाओं में तेजी से फैल रहा है। वे इसके एडिक्ट दिन में 8 से 10 घंटे तक इस डिजिटल या ट्रांस म्यूजिक को सुनते हैं। इससे समाजिक और परिवारिक रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पीड़ित युवा न घर वालों की बात सुनते हैं और न ही उनसे बातचीत करते हैं।

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इस नाम से म्यूजिक बीट्स

गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के मनोरोग विभाग के एचओडी डॉ. जेपी अग्रवाल ने बताया कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग तरह के नशे के मामले सामने आते रहे हैं। गांजा-भांग जैसे नशे स्पष्ट हैं, लेकिन अब नया ट्रेंड डिजिटल ड्रग का सामने आ रहा है।

इसमें किशोर और युवा हेडफोन लगाकर यूट्यूब या अन्य म्यूजिक एप पर ‘डिजिटल कैनाबिस’, ‘डिजिटल कोकेन’ जैसे नाम वाले म्यूजिक बीट्स में मगन हो जाते हैं। वे इन्हें घंटों सुनते हैं और फिर इसके आदी हो जाते हैं। इसे ही डिजिटल ड्रग एडिक्शन कहते हैं। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पिछले 15 दिन में ही 3 केस सामने आए हैं।

ऐसे काम करता है डिजिटल ड्रग

यह एक प्रकार का साउंड होता है। इसमें दोनों कानों में अलग-अलग फ्रीक्वेंसी की साउंड सुनाई देती हैं। इससे दिमाग कंफ्यूज होकर दोनों साउंड्स को एक बनाने की कोशिश में जुट जाता है। इससे दिमाग में अपने आप ही तीसरा साउंड बन जाता है। इस साउंड को सिर्फ हम सुन सकते हैं। दिमाग की इस एक्टिविटी से युवा अपने आपको शांत और नशे की स्थिति में पाता है।

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इस तरह हो जाता है खतरनाक

  • बीट्स को बार-बार सुनने की आदत हो जाती है।
  • बिना यह साउंड सुने नींद नहीं आती।
  • फिर यह नशे की ओर प्रेरित कर देता है।
  • दिमाग काबू में नहीं रहता।
  • बिना मोबाइल दो मिनट भी नहीं रह पाते।

जानें फिलोसोफर म्यूजिशियन क्या कहते हैं ?

फिलोसोफर म्यूजिशियन देवऋषि बताते हैं कि ट्रांस म्यूजिक इलेक्ट्रॉनिक और डांस म्यूजिक शैली है। जिसे ज्यादातर लोग अपनी तकलीफों को दूर करने के लिए हेड फोन में सुनते हैं। लोग उसे एडिक्शन की तरह सुनने लगे हैं।

तेज साउंड से नष्ट हो जाते हैं हेयर सेल्स

हमीदिया अस्पताल भोपाल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. यशवीर जेके ने बताया कि कान में हेयर सेल्स होते हैं जो तेज साउंड से नष्ट हो जाते हैं। जितने अधिक हेयर सेल्स नष्ट होंगे सुनने की क्षमता उतनी कम होती जाएगी। यह सेल्स दोबारा नहीं उगते हैं, जो चिंताजनक है।

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कैसे बचें इस एडिक्शन से ?

  • विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल ड्रग एक तरह से एडिक्शन है। इसलिए इस तरह की किसी भी म्यूजिक को हेडफोन से जितना कम हो सके सुना जाए।
  • सही तरीका यह है कि 60-60 नियम का पालन करें। इस नियम का अर्थ है कि आप 60 प्रतिशत वॉल्यूम में म्यूजिक सुनें और 60 मिनट से ज्यादा न सुनें।
  • अगर आप कोई भी ट्रांस म्यूजिक सुन रहे हैं तो यह नियम फॉलो करना जरूरी है। 130-160 BPM पर ही म्यूजिक सुनें।

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