Dhoti Kurta Cricket: जब धोती-कुर्ता पहन क्रिकेट मैदान में उतरे पंडित, खूब लगाए चौके-छक्के, संस्कृत में हुई कमेंट्री, देखें वीडियो

Dhoti Kurta Cricket: जब धोती-कुर्ता पहन क्रिकेट मैदान में उतरे पंडित, खूब लगाए चौके-छक्के, संस्कृत में हुई कमेंट्री, देखें वीडियो, Dhoti Kurta Cricket Match in Bhopal pandits played cricket in dhoti Kurta commentary in Sanskrit Maharishi Vedic Parivar

Dhoti Kurta Cricket: जब धोती-कुर्ता पहन क्रिकेट मैदान में उतरे पंडित, खूब लगाए चौके-छक्के, संस्कृत में हुई कमेंट्री, देखें वीडियो

Dhoti Kurta Cricket Match in Madhya Pradesh: देश में क्रिकेट के प्रति लोगों में कितनी दीवानगी है, ये किसी से भी छिपा नहीं है। हर किसी ने छोटे से लेकर बड़े क्रिकेट मैच देखे होंगे लेकिन अगर खिलाड़ी धोती-कुर्ता पहनकर क्रिकेट के मैदान पर उतर पड़ें और जमकर छक्के-चौके लगाए जाएं, इसका शायद आपने कभी अंदाजा भी नहीं लगाया होगा। लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ ऐसा ही क्रिकेट खेला जा रहा है।

अंकुर मैदान में क्रिकेट का अनोखा नजारा
भोपाल (Bhopal) के अंकुर मैदान में वैदिक ब्राह्मण एक खास टूर्नामेंट में धोती-कुर्ता पहनकर बल्ला-गेंद लेकर मैदान में उतरे। इतना ही नहीं कमेंट्री भी संस्कृत भाषा (Sanskrit) में हुई। क्रिकेट खेल रहे पंडित आपस में भी संस्कृत में ही बात कर रहे थे। महर्षि वैदिक परिवार (Maharishi Vedic Parivar) द्वारा आयोजित अंकुर मैदान में क्रिकेट का अनोखा नजारा...

क्रिकेट को 'जेंटलमैन्स गेम' कहा जाता है, लेकिन किसने सोचा था कि लोअर-टीशर्ट में खेले जाने वाले इस स्पोर्ट को धोती-कुर्ता पहनकर भी खेला जा सकता है। अब यह नजारा भी राजधानी भोपाल के अंकुर मैदान में देखने को मिला।

संस्कृत भाषा में कॉमेंट्री
महर्षि महेश योगी क्रिकेट टूर्नामेंट में प्लेयर्स धोती-कुर्ता पहनकर बैटिंग-बॉलिंग और फिल्डिंग करते नजर आए। खेल का प्रारूप पूरी तरह से अलग दिखाई दिया। कॉमेंटेटर्स संस्कृत भाषा में कॉमेंट्री तक करते दिखे।

महर्षि क्रिकेट टूर्नामेंट में सिर्फ वैदिक ब्राह्मणों को खेलने की अनुमति दी गई। प्रतियोगिता में खेल रहे सभी ब्राह्मण अपनी पारंपरिक वेशभूषा में दिखे। खिलाड़ियों ने बताया, पारंपरिक वेशभूषा में होने के बाद भी उनको क्रिकेट खेलने में कोई परेशानी नहीं आई।

टूर्नामेंट का मकसद, लोगों तक ये संदेश पहुंचाना था कि, ब्राह्मण सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि दूसरी विधाओं में भी अव्वल हैं। आयोजन समिति के सदस्य चंद्रशेखर तिवारी ने बताया, इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में धर्म और संस्कृति के बारे में जागरूकता लाना भी है।

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