Delhi: 160 साल पुराने महापौर कार्यालय की हालत हुई जर्जर, कीड़े लगने से खराब हुई यादगार चीजें

नई दिल्ली। दिल्ली के चांदनी चौक के टाउनहॉल स्थित तत्कालीन महापौर का कार्यालय इन दिनों बदहाल हो चुका है। इसकी छतें जर्जर हो चुकी हैं, फर्नीचर पुराने पड़ चुके हैं और कीड़े लगने से यादगार चीजें अलमारियों में सड़ रही हैं।

लगभग 160 साल पुराना टाउनहॉल साल 1958 से लेकर 2009 तक दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का मुख्यालय हुआ करता था। अप्रैल 2010 में एमसीडी के मुख्यालय को आधारिकारिक रूप से नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित भव्य तथा गगनचुंबी सिविक सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया। नीले रंग की पृष्ठभूमि पर सफेद रंग से ‘महापौर’ लिखा एक बोर्ड अभी भी एक लकड़ी के दरवाजे के ऊपर खड़ा है, जिसके अंदर जाकर पुराना कार्यालय आता है। टाउनहॉल एक समय दिल्ली नगर निगम की सत्ता का केंद्र हुआ करता था। हालांकि पुराने जमाने के महापौर कार्यालय की वर्तमान स्थिति काफी दयनीय है। करीब 1860 के आसपास शुरू हुई नगरपालिका प्रशासन प्रणाली के जरिये 7 अप्रैल, 1958 को एमसीडी अस्तित्व में आई थी।

उत्तरी दिल्ली के पूर्व महापौर जयप्रकाश कहते हैं, ”इमारत के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए पहले यहां कुछ प्रतीकात्मक बैठकें की जाती थीं। एक सदी से भी अधिक समय तक टाउनहॉल से शहर का नागरिक प्रशासन चलता रहा और साल 1958 में एमसीडी की स्थापना हुई।” उन्होंने कहा, ”अब लगभग तीन वर्षों से, कोई बैठक नहीं हुई है और पहले कार्यालय के लिये इस्तेमाल किए जाने वाले कमरे बंद हैं। इसलिए इसका बदहाल होना स्वाभाविक है। लेकिन हम इस पर गौर करेंगे।” प्रकाश ने कहा कि एनडीएमसी ने टाउनहॉल को एक होटल के रूप में चलाने के लिए 33 साल के पट्टे पर देने के लिए निविदाएं जारी की थीं। उन्होंने कहा कि यह फैसला संरचना के रखरखाव को सुनिश्चित करने के साथ-साथ निगम के राजस्व का प्रबंध करने के लिये लिया गया था। निकाय के एक अधिकारी ने कहा, ”अभी पार्टी आगे नहीं आई है। इसलिए योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

अब टाउनहॉल को लेकर निकाय चुनाव के बाद कोई ठोस योजना बनाई जा सकती है क्योंकि एमसीडी के एकीकरण के बाद उसका पूरा स्वरूप ही बदल जाएगा।” गौरतलब है कि पहले एकीकृत दिल्ली नगर निगम हुआ करता था, जिसे साल 2011 में तीन भागों उत्तरी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में विभाजित कर दिया गया था। उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दक्षिण दिल्ली नगर निगम में फिलहाल 104-104 जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 64 वार्ड हैं। संसद ने हाल में एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत दिल्ली नगर निगम को फिर से एकीकृत किया जाएगा। विधेयक के अनुसार एकीकृत दिल्ली नगर निगम में वार्डों की संख्या 250 से अधिक नहीं होगी और जब तक संशोधित कानून के तहत निकाय की पहली बैठक आयोजित नहीं की जाती तब तक एक विशेष अधिकारी को इसके कार्य की देखरेख के लिए नियुक्त किया जा सकता है।

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