दिल्ली दंगा : अदालत ने तीन लोगों की जमानत दी, जांच में ढिलाई पर तीखी टिप्पणी की

नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) यहां की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में तीन लोगों को सोमवार को जमानत देते हुए कहा कि बहुत ‘‘लापरवाही’’ से मामले की जांच की गयी और बहुत ‘‘ढीले-ढाले तरीके से आरोप पत्र’’ दाखिल किया गया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने पिछले साल 25 फरवरी को दंगों के दौरान जाफराबाद इलाके में फलों के एक गोदाम में लूटपाट और आगजनी के मामले में ओसामा, आतिर और गुलफाम को दस-दस हजार रुपये की जमानत राशि और इतनी राशि के मुचलके पर जमानत दे दी ।

अदालत ने कहा कि जमानत याचिकाओं पर पुलिस के जवाब में कुछ गवाहों की सूची दी गयी, लेकिन पिछले साल मई में दाखिल आरोप पत्र में कुछ गवाहों के बयान नहीं थे।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘जमानत याचिकाओं, इसके जवाब में दाखिल हलफनामे और खासकर आरोप पत्र पर गौर करने के बाद यही लगता है कि लापरवाही से आरोप पत्र तैयार कर इसे दाखिल किया गया। जांच में भी लापरवाही बरती गयी।’’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘गवाहों की जो सूची दाखिल की गई, उसमें कुछ गवाहों का उल्लेख है। सीआरपीसी की धारा 161 (पुलिस द्वारा पूछताछ) के तहत किसी भी गवाहों के बयान को आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद 22 मई को बहुत ढीले-ढाले तरीके से आरोप पत्र दाखिल किया गया।’’

अदालत ने तीनों आरोपियों को सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने और बिना अनुमति के दिल्ली से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया।

विशेष लोक अभियोजक उत्तम दत्त ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी दंगा में शामिल थे।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप

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