Delhi Blast Update: TATP विस्फोटक के ट्रेस मिले, यह क्या है और आतंकी इसे क्यों करते हैं इस्तेमाल, जानें पूरी डिटेल

What is TATP: दिल्ली ब्लास्ट में कार से मिले जूते में TATP के ट्रेसेस, शू बम तकनीक और सुसाइड अटैक की पुष्टि, NIA जांच तेज।

Delhi Blast Update: TATP विस्फोटक के ट्रेस मिले, यह क्या है और आतंकी इसे क्यों करते हैं इस्तेमाल, जानें पूरी डिटेल

हाइलाइट्स

  • कार से मिला जूता, TATP ट्रेस मिले
  • सुसाइड अटैक की पुष्टि हुई
  • TATP कई बड़े हमलों में इस्तेमाल

What is TATP: दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके में NIA को एक अहम सुराग हाथ लगा है। सुरक्षा एजेंसियों को उस कार से एक जूता मिला है जिसमें विस्फोट हुआ था। फोरेंसिक टेस्ट में इस जूते और कार के हिस्सों पर अमोनियम नाइट्रेट और खतरनाक विस्फोटक TATP यानी Triacetone Triperoxide के ट्रेसेस मिले हैं। यह वही विस्फोटक है जिसे आतंकी दुनिया Mother of Satan कहते हैं, क्योंकि यह मामूली सी रगड़, हल्के झटके या थोड़ी सी गर्मी से भी फट सकता है। जांच टीमें अब इस एंगल पर ज्यादा फोकस कर रही हैं, क्योंकि TATP का इस्तेमाल किसी साधारण धमाके के लिए नहीं इस्तेमाल किया जाता।

कार की ड्राइविंग सीट से मिला जूता

सूत्रों के मुताबिक जिस जूते से TATP के निशान मिले हैं, वह ब्लास्ट वाली कार की ड्राइविंग सीट के पास पड़ा मिला। शुरुआती अनुमान है कि धमाके से ठीक पहले इसे ट्रिगर की तरह इस्तेमाल किया गया। NIA ने बताया कि कार चला रहा डॉ. उमर उल नबी सुसाइड बॉम्बर था और यही पहली आधिकारिक पुष्टि है कि यह हमला आत्मघाती था।

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इस हादसे में जिस कार का इस्तेमाल किया गया वो आमिर राशिद अली के नाम पर रजिस्टर थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आमिर को 10 दिन की NIA रिमांड पर भेज दिया।

10 नवंबर को हुए ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत और 24 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। TATP के ट्रेसेस मिलने से यह साफ हो रहा है कि हमलावर सिर्फ विस्फोटक नहीं ले जा रहा था, बल्कि उसे मौके पर सक्रिय करने का पूरा तरीका भी उसके पास था।

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TATP क्या है और इसे आतंकी क्यों चुनते हैं

TATP यानी Triacetone Triperoxide एक अत्यधिक अस्थिर और खतरनाक विस्फोटक है। इसे एसिटोन, हाइड्रोजन पेरऑक्साइड और एसिड जैसे बेसिक केमिकल्स से तैयार किया जा सकता है, जो इसे आतंकी संगठनों के लिए आसान विकल्प बन जाता है। यह क्रिस्टल जैसा पदार्थ हल्का होता है, लेकिन इसका धमाका किसी भी सैन्य श्रेणी के विस्फोटक जैसा विनाश कर सकता है। इसमें धातु नहीं होती, इसलिए मेटल डिटेक्टर और स्कैनर इसे पकड़ नहीं पाते। इसी वजह से यह एयरपोर्ट, मेट्रो और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़े हमलों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

[caption id="" align="alignnone" width="1705"]publive-image आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद।[/caption]

TATP कैसे करता है रिएक्शन

TATP (Triacetone Triperoxide) का केमिकल फॉर्मूला C9H18O6 है। TATP एक Extremely Unstable Compound है जो Shock या Heat से Trigger होने पर Rapid Decomposition Reaction करता है। इस Process में, यह तेजी से टूटकर Heavy Amount में Hot Gases Generate करता है, जिससे एक Powerful Explosive Shockwave बनती है।

[caption id="" align="alignnone" width="1184"]publive-image TATP एक Extremely Unstable Compound है।[/caption]

आतंकी हमलों में TATP का इतिहास

दुनिया में कई बड़े आतंकी हमले TATP से जुड़े रहे हैं। 2001 में अमेरिकी विमान को उड़ाने की कोशिश करने वाले शू बॉम्बर रिचर्ड रीड ने भी जूते में छिपाया TATP इस्तेमाल किया था। 2005 के लंदन ब्लास्ट में यही विस्फोटक इस्तेमाल हुआ, जिसमें 52 लोग मारे गए थे। 2016 के ब्रसेल्स एयरपोर्ट और मेट्रो हमलों में भी आतंकियों ने इसी विस्फोटक का सहारा लिया। ISIS के कई मॉड्यूल इसे बनाते और ट्रेनिंग में इस्तेमाल करते रहे हैं क्योंकि इसे तैयार करना आसान है, लेकिन संभालना बेहद जोखिम भरा।

दिल्ली ब्लास्ट में इसके मिलने का मतलब यह है कि मॉड्यूल बेहद प्रशिक्षित था और उसने हमले की तैयारी काफी पहले से की थी। एजेंसियां अब यह जांच रही हैं कि TATP बनाने का केमिकल नेटवर्क कहां से आया, इसे किसने तैयार किया और क्या दिल्ली या आसपास के इलाकों में इसके और भी स्टैश मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता अब यह समझना है कि यह मॉड्यूल कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग सक्रिय रूप से शामिल थे।

Delhi Blast Update: शू बॉम्ब तकनीक से किया हमला, NIA जांच में बड़े सुराग, कार मालिक आमिर 10 दिन की रिमांड पर

दिल्ली ब्लास्ट की जांच एक चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। एजेंसियों ने पुष्टि की है कि हमला आम तरीके से नहीं, बल्कि शू बॉम्ब तकनीक से किया गया था। आरोपी आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद ने अपने जूते में छिपाए गए TATP विस्फोटक का इस्तेमाल किया। फोरेंसिक टीम को कार की ड्राइविंग सीट के नीचे से जो जूता मिला, उसने पूरी कहानी बदल दी। उसी जूते और फ्रंट टायर से TATP के ट्रेसेस बरामद हुए हैं। जांच से साफ है कि यह ब्लास्ट अचानक किया गया कदम नहीं था, बल्कि लंबे समय से तैयार की गई योजना का हिस्सा था। वहीं इस हादसे में जिस कार का इस्तेमाल किया गया वो आमिर राशिद अली के नाम पर रजिस्टर थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आमिर पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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