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भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गरीबों को सुस्वादु और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाकर अनमोल दुआएं प्राप्त करें। नगरीय निकाय और जो स्वैच्छिक संस्थाएं यह कार्य कर रही हैं, निश्चित ही बधाई की पात्र हैं। भूखे को भोजन और प्यासे को पानी पिलाने से नारायण मिल जाते हैं। मुख्यमंत्री आज मिंटो हाल में दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना के अंतर्गत प्रदेश में सुदृढ़ीकृत और नवीन 100 रसोई deen dayal antyodaya yojana launch केंद्र का वर्चुअल शुभारंभ कर रहे थे।
दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत वर्ष 2017 से 51 जिला मुख्यालयों में 56 रसोई केन्द्र प्रारंभ हुए थे। उस समय 5 रूपये में भोजन की थाली उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई थी। वर्तमान में नगरीय निकायों और स्वैच्छिक संस्थाओं ने वर्ष के 310 दिन योजना का संचालन करने की व्यवस्था की है। इसमें सोमवार से शनिवार तक दस रुपए में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक रोटी, सब्जी, दाल, चावल का प्रदाय थाली में किया जाएगा।
मौसमी हरी सब्जी भी थाली में परोसी जाएगी। योजना के प्रथम चरण में 1 करोड़ 42 लाख से अधिक थालियों के माध्यम से गरीबों को भोजन करवाया गया है। नए रसोई केन्द्रों की स्थापना और संचालन के लिए राज्य शासन ने 28 करोड़ रूपए की राशि मंजूर की है। ये केन्द्र शहरों में बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन और जिला अस्पताल के आसपास प्रारंभ किए गए हैं। इन केन्द्रों को गूगल मेप की सहायता से ढूंढने की सुविधा भी प्रारंभ की गई है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई-लिखाई और दवाई बुनियादी जरूरतें हैं। कहा भी गया है भूखे भजन न हो गोपाला। अन्न ही ब्रह्म है। अपने गांव छोड़कर शहरों में आने वाले श्रमिक और अन्य लोग अपना और बच्चों का आसानी से पेट भर सकें, इस दृष्टि से रसोई केन्द्र उपयोगी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से प्रारंभ इस योजना का विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिला मुख्यालयों के अलावा प्रमुख धार्मिक पर्यटन नगर योजना में जोड़े गए हैं। इसके अलावा अन्य कस्बों, नगरों में भी रसोई केन्द्र प्रारंभ किए गए हैं। इनका विस्तार किया जाए। यह मानवता के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा।
मुख्यमंत्री ने किया पोर्टल का लोकार्पण
मुख्यमंत्री चौहान ने योजना के लिए बनाए गए पोर्टल का लोकार्पण किया। इस पोर्टल से योजना का नियमित और सतत पर्यवेक्षण किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने योजना के क्रियान्वयन में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग की सराहना की।
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