Ratan Naval Tata: साइरस मिस्त्री की तरह अपने समुदाय के हिसाब से नहीं होगा रतन टाटा का अंतिम संस्कार, ये है वजह

Ratan Tata Death: पारसी रीति रिवाज से नहीं बल्कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार वर्ली के इलेक्ट्रिक अग्निदाह में होगा रतन टाटा का अंतिम संस्कार

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Ratan Tata Death: रतन टाटा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। रतन टाटा 86 वर्ष के थे और कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। 9 अक्टूबर की रात उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

10 अक्टूबर को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, लेकिन उनका अंतिम संस्कार उनके समुदाय के हिसाब से नहीं किया जाएगा। आइये आपको इसके पीछे की वजह आपको बताते हैं।

पारसी समुदाय से आते हैं रतन टाटा

रतन टाटा पारसी थे, फिर भी उनका अंतिम संस्कार पारसी रीति रिवाजों से नहीं होगा।

बता दें कि साइरस मिस्त्री भी पारसी थे, लेकिन उनका भी अंतिम संस्कार पारसी रीति रिवाजों से न कर हिंदू रीति रिवाज से किया गया था। टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की मृत्यु 4 सितंबर 2022 को महाराष्ट्र के पालघर में रोड एक्सीडेंट में हुई थी।

पारसी समुदाय का पर्यावरण से लगाव है वजह

पारसी समुदाय का पर्यावरण से अलग ही लगाव है। इसलिए उनके रीति रिवाजों में ऐसी कोई परंपरा नहीं जिसके कारण पर्यावरण को नुकसान हो। पारसी लोग मृत शरीर को अशुद्ध मानते हैं।

पारसी समुदाय की धारणा रही है कि यदि मृत शरीर को दफनाया जाएगा तो वह मिट्टी को प्रदूषित करेगा। पानी में बहाने पर जल प्रदूषित होगा और जलाने पर हवा प्रदूषित होगी। इससे अग्नितत्व प्रदूषित होते हैं।

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पारसियों में इस तरह होता है अंतिम संस्कार

पारसी लोगों में शव को आसमान को सौंपते हुए 'टावर ऑफ साइलेंस' के ऊपर रख दिया जाता है। टावर ऑफ साइलेंस को दखमा कहा जाता है। टावर ऑफ साइलेंस एक गोलाकार ढांचा होता है, जिसके ऊपर ले जाकर शव को सूरज की धूप में रख दिया जाता है।

जिसके बाद शव को गिद्ध, चील और कौए खा लेते हैं। पारसी धर्म में किसी शव को जलाना या दफनाना प्रकृति को गंदा करने जैसा माना जाता है।

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इस रीति रिवाज से होगा अंतिम संस्कार

रतन टाटा के पार्थिव शरीर को वर्ली के इलेक्ट्रिक अग्निदाह के लिए लेकर जाएंगे। फिर, उनके शरीर को प्रार्थना हॉल में रखा जाएगा। प्रार्थना हॉल में करीब 200 लोग मौजूद रह सकते हैं। करीब 45 मिनट तक प्रार्थना होगी।

फिर, प्रार्थना हॉल में पारसी रीति से ‘गेह-सारनू’ पढ़ा जाएगा। उसके बाद रतन टाटा के मुंह पर एक कपड़े का टुकड़ा रख कर ‘अहनावेति’ का पहला पूरा अध्याय पढ़ा जाएगा। ये एक शांति प्रार्थना की प्रक्रिया है।

प्रार्थना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर को इलेक्ट्रिक अग्निदाह में रखा जाएगा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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