Dayashankar and Swati Singh Divorce: शादी के 22 साल बाद राहें जुदा-जुदा ! मंत्री दयाशंकर सिंह पत्नी स्वाति से हुए अलग

प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और उनकी पत्नी स्वाति सिंह ने शादी के 22 साल बाद राहें जुदा कर ली है जिसके साथ ही उन्होंने तलाक ले लिया है।

Dayashankar and Swati Singh Divorce: शादी के 22 साल बाद राहें जुदा-जुदा ! मंत्री दयाशंकर सिंह पत्नी स्वाति से हुए अलग

Dayashankar Singh and Swati Singh Divorce: नेताओ की राजनीति हो या निजी जिदंगी बवाल मचते ही रहते है ऐसा ही उत्तरप्रदेश में हुआ है जहां पर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और उनकी पत्नी स्वाति सिंह ने शादी के 22 साल बाद राहें जुदा कर ली है जिसके साथ ही उन्होंने तलाक ले लिया है।

पत्नी स्वाति सिंह ने कोर्ट में दी थी अर्जी 

आपको बताते चलें कि, यहां पर पूर्व मंत्री स्वाति सिंह की तरफ से बीते साल 30 सितंबर को फैमिली कोर्ट में वाद दाखिल किया गया था। जहां पर पति दयाशंकर सिंह को लेकर कहा था कि, वो चार साल से पति से अलग रह रही हैं. दोनों के बीच कोई वैवाहिक रिश्ता नहीं हैं. जिसके बाद कोर्ट ने दोनों के तलाक पर मुहर लगा दी। वही पर इससे पहले स्वाति ने साल 2012 में अर्जी दाखिल की थी, लेकिन किसी वजह से अदालत ने अर्जी खारिज कर दी. जिसके बाद मार्च 2022 में भी स्वाति सिंह ने एक अर्जी देकर केस को दोबारा शुरू करने की अपील की. हालांकि, बाद में उन्होंने उस अर्जी को वापस ले लिया और एक नई याचिका दायर की थी।

मामले पर क्या बोले दयाशंकर

आपको बताते चलें कि, यहां पर इस मामले में दयाशंकर सिंह ने कहा कि, उन्होंने कहा, "तलाक एकतरफा है। न मैंने अर्जी दी। न मैं अदालत गया। अब मैं इस मसले पर आगे नहीं बढूंगा। उनकी (स्वाति) की राजनीतिक महत्वाकांक्षा इसकी वजह है।"

दोनों ने की थी लव मैरिज

आपको बताते चलें कि, यहां पर दयाशंकर सिंह और स्वाति सिंह दोनों ही बलिया के रहने वाले हैं. दोनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे. इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद उनकी दोस्ती हुई और फिर ये दोस्ती प्यार में बदल गई. स्वाति सिंह इलाहाबाद में एमबीए की पढ़ाई कर रही थीं, जबकि दयाशंकर सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति कर रहे थे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यक्रम में दोनों की बातचीत हुई और प्यार परवान चढ़ते ही परिवार की सहमति से शादी हो गई थी। स्वाति सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया और यहीं पर पढ़ाने भी लगीं. स्वाति सिंह एक घरेलू महिला थीं, लेकिन जब हजरतगंज चौराहे पर बसपा नेताओं ने उन्हें और उनकी बेटी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, तब उन्होंने कड़ा प्रतिरोध किया. इसी के बाद उनके सितारे बुलंद हुए और उन्हें भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया। बताया जा रहा है कि, स्वाति भी मंत्री का पदभार संभाल चुकी है।

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