दो प्राइवेट अस्पतालों में 50-50 हजार देकर करवाया मां का इलाज, फिर भी नहीं बची जान, शव लेकर भटकती रही बेटी

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भोपाल। कोरोना काल में लगातार परिजनों ने अस्पतालों के प्रबंधन पर कई बार लापरवाही के गंभीर आरोप लगा चुके है उसके बाद ​भी लगातार अस्पताल प्रबंधन की ओर से लापरवाही सामने आ रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर एक बेटी ने जयप्रकाश अस्पताल (जेपी) प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। बेटी का कहना है कि वह अपने चाचा के साथ वह मां का शव लेकर भटकती रही, लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की।

कोलार निवासी प्रियंका ने बताया कि उनके पिता की 8 साल पहले मौत हो गई थी। पिता के मौत के बाद मां को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। मां भोपाल कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक कोटरा सुल्तानाबाद ब्रांच में कार्यरत थीं। 14 सितंबर को मां को कोरोना हो गया। दो प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर 50-50 हजार  महज 18 घंटे के अंदर ले लिए गए। उसके बाद भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। मजबूर होकर मैं अपनी मां को एंबुलेंस में बैठाकर शहर में इधर से उधर घूमती रही, लेकिन कहीं भी उनकी मां को भर्ती नहीं किया।

कलेक्टर और मंत्री के दरवाजे तक खटखटा आई
बेटी ने आरोप लगाया गया कि मैं अपनी मां जो कि कोरोना संक्रमित थी। उनके शव को लेकर अपने चाचा के साथ वह भटकती रही। उनका आरोप है कि पहले तो इलाज में देरी की गई। ऑक्सीजन सप्लाई सही से नहीं हुई। वे भोपाल कलेक्टर और मंत्री के दरवाजे तक खटखटा आई, लेकिन मदद नहीं मिली। मौत के बाद भी उसकी मां को सुकून नहीं मिला और उन्हें यूं ही छोड़ दिया गया। परिजनों ने ही रात में शव को मर्चुरी में रखा। अस्पताल प्रबंधन ने कोई जवाब नहीं दिया।

ये लगाए आरोप
बेटी ने आरोप लगाया गया कि मैं मां की जब तबीयत खराब हुई तो उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई, तब जाकर जेपी अस्पताल में मां को भर्ती किया गया, लेकिन भर्ती करने के अलावा उनका किसी तरह का इलाज नहीं किया गया। मैं दिन भर अस्पताल के बाहर रहती थी। जरूरत पड़ने पर आईसीयू में जाकर मां की मदद करती थी। खाना-पीना भी उनकी तरफ से ही दिया जाता था। प्रियंका ने आरोप लगाया कि गुरुवार रात मां की मौत हो गई उसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि अब तुम शव को ले जाओ। उन्होंने ना तो मां को पीपीई किट पहनाई और ना ही वार्डबॉय तक दिया। रात को वह अपने चाचा के साथ मां को आईसीयू बेड पर लेकर स्ट्रेचर तक लाए।

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