Damoh News: दमोह में लड़कियों को बिना कपड़े के घुमाने वाली महिलाओं के खिलाफ पुलिस ने दिखाई सख्ती, मामला दर्ज

दमोह। प्रदेश के दमोह जिले में बीते दिनों बारिश की आस के लिए कुछ महिलाओं ने नाबालिग लड़कियों को बिना कपड़ों के घुमाया था। महिलाओं ने बारिश कराने के लिए यह एक टोटके के रूप में किया था। इस मामले का सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद काफी बवाल मचा था। राष्ट्रीय बाल सरंक्षण एवं अधिकार आयोग ने भी मामले में संज्ञान लिया था। इस मामले की जांच के आदेश भी जिला कलेक्टर को दिए गए थे। अब मामले की जांच करते हुए पुलिस ने गांव की 6 महिलाओं के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जिले के एडिशनल एसपी शिवकुमार सिंह ने मीडिया को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जबेरा ब्लॉक के बनिया गावं में मासूमों को निर्वस्त्र कर घुमाने के आरोप में 6 महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले की जांच की कमान जबेरा थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके हिसाब से कार्यवाही की जाएगी।

यह है पूरा मामला…
प्रदेश के दमोह जिले के एक गांव में कथित तौर पर बारिश के लिए देवता को खुश करने और सूखे जैसी स्थिति से राहत पाने के लिए एक कुप्रथा के तहत कम से कम छह बच्चियों को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाये जाने का मामला सामने आया था। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मामले में संज्ञान लेते हुए दमोह जिला प्रशासन से इस घटना की रिपोर्ट तलब की थी।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया था कि बुंदेलखंड क्षेत्र के दमोह जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर जबेरा थाना क्षेत्र के बनिया गांव में रविवार को यह घटना हुई थी। दमोह के जिलाधिकारी एस कृष्ण चैतन्य ने कहा कि एनसीपीसीआर को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) डी आर तेनिवार ने कहा कि पुलिस को सूचना मिली थी कि स्थानीय प्रचलित कुप्रथा के तहत बारिश के देवता को खुश करने के लिए कुछ नाबालिग लड़कियों को नग्न कर घुमाया गया था।

अंधविश्वास के चलते उठाया कदम…
जानकारी के मुताबिक, सूखे की स्थिति के चलते बारिश ना होने के कारण पुरानी मान्यता के मुताबिक गांव की छोटी-छोटी बच्चियों को नग्न कर उनके कंधे पर मूसल रखा जाता है और इस मूसल में मेंढक को बांधा जाता है। बच्चियों को पूरे गांव में घुमाते हुए महिलाएं पीछे-पीछे भजन करती हुई जाती हैं और रास्ते में पड़ने वाले घरों से यह महिलाएं आटा, दाल या अन्य खाद्य सामग्री मांगते हैं और जो भी खाद्य सामग्री एकत्रित होती है उसे गांव के ही मंदिर में भंडारा के माध्यम से पूजन किया जाता है।

मान्यता है कि इस प्रकार की कुप्रथा करने से बारिश हो जाती है। अधिकारी ने कहा कि इन लड़कियों के माता-पिता भी इस घटना में शामिल थे और अंधविश्वास के तहत उन्होंने ऐसा किया। इस संबंध में किसी भी ग्रामीण ने कोई शिकायत नहीं की है। जिला कलेक्टर ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन केवल ग्रामीणों को इस प्रकार के अंधविश्वास की निरर्थकता के बारे में जागरूक कर सकता है और उन्हें समझा सकता है कि इस तरह की प्रथाओं से वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं। इस बीच, घटना के दो वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें बच्चियां निर्वस्त्र दिखाई दे रही हैं।

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