वो डकैत जिसने खाई थी 151 ब्राह्म्णों को मारने की कसम, जानिए डकैत की खौफनाक कहानी

वो डकैत जिसने खाई थी 151 ब्राह्म्णों को मारने की कसम, जानिए डकैत की खौफनाक कहानी

Dacoit Jagjivan Parihar : एक समय था जब यूपी और मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में डकैतों की तूती बोला करती थीं। मध्यप्रदेश का भिंड जिला डकैतों के जिले के नाम से जाना जाता है। भिंड़ जिले में एक गांव था ललूपुरा चौरेला, इस गांव में एक खतरनाक और खूंखार डकैत जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) ने जन्म लिया था। जिस दौर में जगजीवन परिहार जवान हुआ करता था। उस समय चंबल इलाके में डकैतों का आतंक हुआ करता था। जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में कमजोर था। उसका डकैतों के साथ उठना बैठना काफी थी। जिसका फायदा पुलिस उससे डकैतों की जानकारी लेने में उठाती थी। इसके बदले में जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) की कुछ आमदानी भी हो जाती थी। जगजीवन डकैतों के बारे में जानकारियां जुटाकर पुलिस को देता था। इसके लिए वह डकैतों के गिरोह में भी शामिल हो गया था।

पुलिस को हुआ जगजीवन पर शक

पुलिस के कुछ अधिकारियों को जगजीवन पर शक होने लगा था जिसके चलते पुलिस ने जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar)  के खिलाफ कई मामले दर्ज कर लिए थे। पुलिस द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई को देख जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) पुलिस से पूरी तरह से कट गया और वह डकैतों का सहयोग करने लगा। जगजीवन डकैतों (Dacoit Jagjivan Parihar) के साथ अपहरण जैसी बारदतों में शामिल होने लगा। जिसके बदले में डकैत उसे मोटी रकम देते थे। साल 2003 तक जगजीवन चंबल का सबसे खूंखार अपराधी बन चुका था। उसने जंगल में अपना ठिकाना बना लिया था। धीरे-धीरे जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar)  ने अपना अलग गिरोह बना लिया। बताया जाता है कि जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) गांव के ही एक स्कूल में चपरासी की नौकरी करता था। यह वही स्कूल था जिसके निर्माण के लिए जमीन उसके पूरखों ने दी थी। बताया यह भी जाता है कि जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) को गांव के लोग परेशान करते थे, इसलिए वह डकैत बना था।

जगजीवन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा

जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) गिरोह बनाकर इलाके में आतंक मचाना शुरू कर दिया। गिरोह बनने के बाद जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा। एमपी और यूपी के कई जिलों में उसकी तूती बोलने लगी। जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) का आतंक इतना बढ़ गया था कि लोग उससे नाम से खौफ खाने लगे थे। जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) के आतंक के चलते पुलिस की टीमें लगातार उसके मूमेंट पर नजर बनाए रखती थी। लेकिन जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था।

पुलिस के चुंगल में फंसा जगजीवन

बात 13 मार्च 2007 की है। जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) अपने गिरोह के कुछ सदस्यों के साथ मुरैना-भिंड के बॉर्डर पर डेरा डाले हुए था। उसी समय पुलिस को गुप्त सूचना मिली की जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) अपने साथियों के साथ डेरा डाले हुए है। सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स लेकर गढ़िया गांव पहुंच गई और जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) को घेर लिया। पुलिस को देख डकैतों ने पुलिस पर फायरिंग करना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों और से मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस और डकैतों के बीच करीब 18 घंटे मुठभेड़ चली। मुठभेड़ में जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) ओर उसके 5 साथी ढेर हो गए। वही एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया।

जगजीवन ने जला दिया था युवक को जिंदा

जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) के अपने ही गांव के एक व्यक्ति से पुरानी रंजिश थी। जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) को युवक पर शक था की वह पुलिस से मिला हुआ है। साल 2005 में जगजीवन होली वाले दिन गांव में पहुंचा और युवक को जिंदा जला दिया। जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) पर करीब 50 हत्याओं के मामले दर्ज थे। जगजीवन पर पुलिस ने 5 लाख 75 हजार का इनाम रखा था। जगजीवन के पूरे गिरोह पर करीब 15.5 लाख का इनाम था।

खाई थी 151 ब्राह्मण को मारने की कसम

जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) ने 151 ब्राह्मणों को मारने की कसम खाई थी। जगजीवन की इस कसम ने ब्राह्मण समाज को डरा के रख दिया था। ब्राह्मण समाज खुद चाहती थी कि जगजीवन परिहार (Dacoit Jagjivan Parihar) का एनकाउंटर हो जाना चाहिए। चंबल इलाके के ग्रामीण ब्राह्मणों में जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) के नाम से रूह कांप उठती थी। क्योंकि जगजीवन ने कसम जो खाई थी 151 ब्राह्मणों को मारने की। जगजीवन (Dacoit Jagjivan Parihar) ब्राह्मणों को तो नहीं मार पाया लेकिन पुलिस ने जरूर उसे मौत की नींद सुला दिया।

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