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नई दिल्ली। ताउते तूफान के बाद भारत में एक और तूफान जल्द ही दस्तक देने वाला है। इस तूफान का नाम है 'यास'। यास धीर-धीरे बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। तूफान मंगलवार को तट से टकरा सकता है। इस वक्त बंगाल की पूर्वी मध्य खाड़ी और उससे सटे अंडमान सागर के ऊपर एक कम दबाव क्षेत्र बन गया है। आइए जानते हैं यास का क्या मतलब होता है?
ओमान ने दिया है तूफान का नाम
यास तूफान का नाम ओमान की तरफ से दिया गया है। यास एक फारसी भाषा का शब्द है। जिसका अंग्रेजी मतलब है 'जैस्मिन'। सरकार ने इसके प्रभाव को देखते हुए बंगाल, ओडिशा में NDRF को उतार दिया है। तूफान की वजह से यहां हवाओं की रफ्तार वर्तमान में 50 किलोमीटर प्रति घंटा है। तूफान का केंद्र कोलकाता से करीब 750 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। तूफान ओमान की तरफ से आया है। तूफान 48 घंटों तक रहेगा। इससे बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश की आशंका है।
अम्फान की तरह है यास तूफान
इस तूफान को 2019 में आए तूफान अम्फान की तरह बताया जा रहा है। तूफान के समय हवाओं की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तूफान के कारण दोनों राज्यों में बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों में भारत को कई तूफानों का सामना करना पड़ा है। जो तूफान देश से टकराए हैं उनमें से फैनी, अम्फान, निसर्ग और ताउते शामिल हैं।
तूफान कैसे बनता है?
मौसम विज्ञानी साइक्लोन को लेकर कहते हैं कि जब गर्म क्षेत्रों के समुद्र में हवा गर्म होकर अत्यंत कम वायुदाब का क्षेत्र बना देती है, तो संघनन से बादलों का निर्माण करती हैं और फिर रिक्त स्थान को भरने के लिए नम हवाएं तेजी के साथ नीचे जाकर ऊपर आती। इसी को तूफान या साइक्लोन करते हैं। इसमें तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश होती है।
नामकरण की शुरुआत
साइक्लोन के नाम को लेकर भी लोग जानना चाहते हैं। क्योंकि इससे पहले जितने भी तूफान आएं हैं उनका नाम अजीबो-गरीब है। जैसे- अम्फान, कटरीना, निवार, निसर्ग, हुदहुद, फानी, बुलबुल, हिकाका आदि। मालूम हो कि चक्रवातों के नामकरण की शुरूआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में हुई एक संधि से की गई थी। जबकि हिंद महासागर क्षेत्र में यह व्यवस्था साल 2004 से शुरू हुई। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पहल पहल पर 8 देशों ने तूफानों का नामकरण शुरू किया। इन 8 देशों में पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान और शाईलैंड शामिल था। बाद में साल 2018 में इसमें यूएई, ईरान, कतर और यमन आदि देश भी जुड़ गए।
इस तरह तूफानों का नाम मिलता है
किसी भी साइक्लोन के नामकरण के लिए सदस्य देश अपनी ओर से नामों की सूची देते हैं। इसके बाद उनकी अल्फाबेटिकल लिस्टिंग की जाती है। उसी क्रम में सुझाए गए नाम पर तूफानी चक्रवातों का नामकरण किया जाता है। हर बार अलग-अलग देशों का क्रम से नंबर आता है और इसी क्रम में जिस देश ने जो नाम दिया चक्रवात का नाम उसी देश के द्वारा दिए गए नाम पर पड़ जाता है।
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