मुख्य खेल अधिकारी पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली सीआरपीएफ कांस्टेबल अपने बयान से मुकरी

नयी दिल्ली, 21 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के मुख्य खेल अधिकारी एवं अर्जुन पुरस्कार प्राप्तकर्ता खजान सिंह और कोच सुरजीत सिंह पर यौन उत्पीड़न, बलात्कार और डराने धमकाने का आरोप लगाने वाली 30 वर्षीय कांस्टेबल अपने आरोपों से मुकर गयी है । आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि खजान सिंह से पूछताछ की गयी और जांच दल द्वारा उनका बयान भी दर्ज किया गया । हालांकि पुलिस ने यह कहते हुए ब्योरा देने से इनकार कर दिया कि जांच अभी चल ही रही है।

सूत्रों ने बताया कि इसी सप्ताह पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया था और वह इस माह के प्रारंभ में दिल्ली पुलिस से की गयी शिकायत में लगाये गये आरोप से मुकर गयी थी।

सूत्रों ने कहा, ‘‘ वह दोनों आरोपियों के विरूद्ध लगाये गये आरोपों से पलट गयी। वह मामले को आगे बढ़ाने को अनिच्छुक है।’’

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि खजान सिंह ने जांच दल के सामने अपना बयान दर्ज कराया और अपने खिलाफ लगे आरोपों का खंडन किया। उससे पहले पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया था।

पुलिस उपायुक्त (द्वारका) संतोष कुमार मीणा ने बताया कि खजान सिंह से पूछताछ की गयी और जांच दल द्वारा उनका बयान भी दर्ज किया गया । हालांकि उन्होंने यह कहते हुए ब्योरा देने से इनकार कर दिया कि जांच अभी चल ही रही है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद इस मामले को उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी से लेकर द्वारका जिले की महिला अपराध शाखा के निरीक्षक को दिया गया और यह शाखा फिलहाल इसकी जांच कर रही है।

तीन दिसंबर को बाबा हरिदास थाने में दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दोनों ही आरोपी महिला कांस्टेबलों का यौन उत्पीड़न करते हैं और फिर उनका ‘अपने साथी’ के रूप में फायदा उठाते हैं।

कांस्टेबल ने प्राथमिकी में आरोप लगाया था, ‘‘ जब मैं नहा रही थी तब उन्होंने चुपके से मेरे फोटो खींच लिये। मुझे इन फोटो के माध्यम से ब्लैकमेल किया गया और उन्होंने धमकी दी कि यदि मैंने उनके साथ बातचीत नहीं की तो वह मेरे फोटो इंटरनेट पर डाल देंगे।’’

प्राथमिकी के अनुसार कांस्टेबल ने खजान और सुरजीत पर सीआरपीएफ में यौन धंधा चलाने का आरोप लगाया और यह भी कहा कि इस काम में उनके ‘कई साथी’ हैं।

कांस्टेबल ने प्राथमिकी में आरोप लगाया, ‘‘ उन्होंने इंटरनेट पर मेरे फोटो डाल देने की धमकी दी और तीन सालों तक लगातार मेरे साथ बलात्कार करने के लिए उन फोटो का इस्तेमाल किया। ’’

प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि दोनों ने कारण बताओ नोटिस भेजकर कथित रूप से उसका उत्पीड़न किया।

प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि मार्च, 2014 में इस महिला कांस्टेबल ने सीआरपीएफ महानिरीक्षक से औपचारिक शिकायत की थी लेकिन उन्हें कथित रूप से आरोपियों ने इसे वापस लेने के लिए बाध्य किया।

महिला कांस्टेबल 2010 में सीआरपीएफ में शामिल हुई थी।

भाषा

राजकुमार उमा

उमा

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