न्यायालय ने विभिन्न एससी-एसटी आयोगों में रिक्तियां संबंधी याचिका पर केंद्र, उप्र से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आयोगों और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में अध्यक्षों और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब देने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद के एक संगठन की जनहित याचिका पर संज्ञान लिया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आयोग में ऐसे समय में कई पद रिक्त हैं जब इन समुदायों पर ज्यादती के अनेक मामले आ रहे हैं।

पीठ में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम भी शामिल हैं।

पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई में आदेश दिया, ‘‘नोटिस जारी किया जाए।’’

शीर्ष अदालत ने उक्त आयोगों को भी नोटिस जारी किये।

संस्था ‘पीपल्स चैरियटीर ऑर्गेनाइजेशन’ (पीसीओ) की तरफ से पेश वकील राजेश इनामदार ने कहा कि एनसीएससी और एनसीएसटी में करीब दस महीने से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्य समेत अनेक पद खाली हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के आयोग में भी 2019 से कुछ पद खाली हैं।

जनहित याचिका में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों को इन आयोगों में खाली पड़े पदों को भरने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश माधव

माधव

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न्यायालय ने विभिन्न एससी-एसटी आयोगों में रिक्तियां संबंबधी याचिका पर केंद्र, उप्र से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आयोगों और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में अध्यक्षों और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब देने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद के एक संगठन की जनहित याचिका पर संज्ञान लिया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आयोग में ऐसे समय में कई पद रिक्त हैं जब इन समुदायों पर ज्यादती के अनेक मामले आ रहे हैं।

पीठ में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम भी शामिल हैं।

पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई में आदेश दिया, ‘‘नोटिस जारी किया जाए।’’

शीर्ष अदालत ने उक्त आयोगों को भी नोटिस जारी किये।

संस्था ‘पीपल्स चैरियटीर ऑर्गेनाइजेशन’ (पीसीओ) की तरफ से पेश वकील राजेश इनामदार ने कहा कि एनसीएससी और एनसीएसटी में करीब दस महीने से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्य समेत अनेक पद खाली हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के आयोग में भी 2019 से कुछ पद खाली हैं।

जनहित याचिका में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों को इन आयोगों में खाली पड़े पदों को भरने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश

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