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US Supreme Court Verdict Trump Tariff Policy: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को गैर कानूनी करार दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ट्रंप सरकार को दूसरे देशों पर मनमाने टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है।
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यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट ने प्रेसिडेंट ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकार के खिलाफ फैसला सुनाया है, और कहा है कि US के ट्रेडिंग पार्टनर्स पर बड़े टैरिफ लगाने के लिए इमरजेंसी अधिकार का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी था।
कोर्ट ने कहा ट्रंप ने की मनमर्जी
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटा दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में सुनाया कि ट्रंप ने दुनिया के कई देशों पर एकतरफा तरीके से जो भारी टैरिफ लगाए थे वे संघीय कानून (Federal law) के खिलाफ है। ये फैसला ट्रंप की विदेश नीति के खिलाफ माना जा रहा है।
6-3 की बहुमत से फैसला आया
यूनाइटिड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ये फैसला सुनाया। बहुमत का फैसला मुख्य न्यायधीश John Roberts ने लिखा। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति को मनमाने ढंग से, बिना समय सीमा और बिना सीमा तय किए चैरिफ लगाने की अधिकार नहीं हैं।
कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी दिखाना जरूरी
मुख्य न्यायधीश John Roberts ने अपने फैसले मे लिखा कि राष्ट्रपति अगर इतना बड़ा और असाधारण अधिकार इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए कांग्रेस की साफ और स्पष्ट मंजूरी दिखानी होगी। CNN के हवाले से खबर।
व्यापार नियंत्रित करने के लिए मिला ये अधिकार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि जिल आपातकालीन अधिकार की सहारा डोनाल्ड ट्रंप ने लिया, वह इस काम के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी कांग्रेस राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति देती है तो वह साफ नियमों और सीमाओं के साथ देती है।
IEEPA से जुड़ा है मामला
बता दें कि ये मामला 1977 के कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोलॉमिक पावर्स एक्ट से जुड़ा है। य़े कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी आपात स्थिति में व्यापार को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। ट्रंप ने फरवरी 2025 में इसी कानून इस्तेमाल करते हुए चीन, मैक्सिको और कनाडा से आने वाले सामान पर टैक्स लगाया था। उन्होंने कहा थी कि इन देशों से ड्रग तस्करी एक आपास स्थिति है।
इसके बाद अप्रैल में ट्रंप ने लगभग पूरी दुनिया से आने वाले सामान पर 10 से 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिए। उनका तर्क था कि अमेरिका का व्यापार घाटा, यानी आयात ज्यादा और निर्यात कम होना, देश के लिए एक असाधारण और गंभीर खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस तर्क और आपात अधिकार के इस्तेमाल को कानून के दायरे से बाहर माना ह
ऐसे में ट्रंप क्या कर सकते हैं
जैसे की अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ कानून के तहत अधिकृत नहीं थे, तो इसका मतलब है कि राष्ट्रपति अकेले अपने अधिकार से ऐसे व्यापक टैरिफ लागू नहीं कर सकते।
अब अगर ट्रंप इस तरह की टैरिफ नीति को स्थायी कानून (Permanent Law) बनाना चाहते हैं, तो उन्हें कांग्रेस (Congress) के जरिए विधेयक (Bill) पास कराना होगा। अमेरिका में कानून बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
सबसे पहले उनकी पार्टी को प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) में एक नया बिल पेश करना होगा, जिसमें साफ लिखा हो कि राष्ट्रपति को किन परिस्थितियों में और कितनी सीमा तक टैरिफ लगाने का अधिकार होगा।
इसके बाद उस बिल पर दोनों सदनों में बहस होगी। बिल को पास कराने के लिए प्रतिनिधि सभा में साधारण बहुमत (Simple Majority) और सीनेट में भी बहुमत की जरूरत होगी। कई मामलों में सीनेट में 60 वोट की जरूरत पड़ सकती है, खासकर यदि विपक्ष बहस लंबी खींचे।
यदि दोनों सदनों से बिल पास हो जाता है, तो उसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वह विधेयक कानून बन जाएगा।
अगर ट्रंप कांग्रेस में इमरजेंसी बिल लाते हैं तो उसक क्या प्रोसेस होगा
1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सीधे रद्द नहीं किया जा सकता
United States Supreme Court के फैसले को राष्ट्रपति या कांग्रेस सीधे पलट नहीं सकती। कोर्ट संविधान की अंतिम व्याख्याता होती है।
2. कांग्रेस नया कानून बना सकती है
अगर कोर्ट ने कहा है कि कोई काम “कानून के तहत अधिकृत नहीं है”, तो
United States Congress नया कानून बना सकती है, जिससे वही काम कानूनी रूप से अनुमति प्राप्त हो जाए।
3. Emergency Bill क्या होता है
Emergency Bill ऐसा बिल होता है जिसे
तेज़ी से पेश किया जाता है
सामान्य से कम समय में बहस कराई जाती है
राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था या आपात स्थिति का हवाला दिया जाता है
लेकिन प्रक्रिया फिर भी संवैधानिक ही रहती है।
4. दोनों सदनों से पास होना जरूरी
बिल को पहले
House of Representatives
और फिर
Senate
से पास होना जरूरी है।
दोनों जगह बहुमत वोट चाहिए।
5. राष्ट्रपति की भूमिका
अगर दोनों सदनों से बिल पास हो जाए, तो उसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है।
President of the United States के साइन के बाद वह कानून बन जाता है।
6. संविधान से टकराव हुआ तो फिर कोर्ट जाएगा
अगर नया कानून भी संविधान से टकराता है, तो उसे फिर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।अंतिम फैसला फिर कोर्ट का ही होगा।
7. संविधान संशोधन सबसे कठिन रास्ता
अगर कांग्रेस चाहती है कि कोर्ट की व्याख्या हमेशा के लिए बदले, तो
संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) लाना पड़ेगा
इसके लिए 2/3 बहुमत कांग्रेस में
और 3/4 अमेरिकी राज्यों की मंजूरी जरूरी होती है
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया "शर्मनाक"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें कोर्ट ने उनकी टैरिफ नीति को अवैध बताया। ट्रंप ने कोर्ट के इस फैसले को शर्मनाक बताया। ट्रंप ने शीर्ष अदालत के फैसले को लेकर असंतोष जताया। जानकारी के अनुसार कोर्ट के फैसले के दौरान ट्रंप दोनों पार्टियों के करीब दो दर्जन राज्यपालों के साथ निजी बैठक कर रहे थे। हालांकि अभी तक व्हाइय हाउस की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
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