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International Women’s Day: हर साल 8 मार्च को महिलाओं की उपलब्धियों, संघर्षों और उनके अधिकारों को सम्मान देने के लिए महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जाता है। बदलते समय के साथ समाज में भी महिलाओं की भूमिका लगातार बदल रही है। आज की युवतियां अपने सपनों को खुलकर जीना चाहती हैं, वहीं मध्यम आयु की महिलाएं परिवार और करियर के बीच संतुलन बना रही हैं और पुरानी पीढ़ी की महिलाएं अपने अनुभवों से नई पीढ़ी को राह दिखा रही हैं।
लेकिन महिलाओं की इस बदलती तस्वीरों में अक्सर पुरुषों द्वारा एक सवाल पूछा जाता है ‘हम तो दिनभर बाहर काम करते हैं, तुम घर में क्या ही काम करती हो? इसी तरह की सोच को समझने के लिए हमने तीन अलग-अलग पीढ़ियों की महिलाओं जिसमें 21 से 30 साल, 30 से 40 साल और 40 से 50 साल की महिलाओं और युवतियों से तीन सवाल पूछे। वो सवाल क्या थे? और उन्होंने क्या जवाब दिए? आइए जानते हैं।
21 से 30 साल की युवतियों का नजरिया
24 साल की शताक्षी जायसवाल का क्या कहना?
24 साल की शताक्षी जायसवाल से जब हमने यह तीन सवाल पहुंचे तो उन्होंने कहा कि, यह बात सही है कि पुरुष बाहर दिनभर काम करते हैं और बहुत मेहनत भी करते हैं, लेकिन इसके बदले यह कहना कि महिलाओं को घर में कोई काम नहीं होता, इससे मैं सहमत नहीं हूं। चाहे महिला विवाहित हो, नौकरी करती हो या हाउसवाइफ हो, हर महिला अपने स्तर पर उतने ही निष्ठापूर्ण तरीके से काम करती है जितना की पुरुष करते हैं। बच्चों की देखभाल से लेकर घर का खाना बनाने तक कोई भी काम आसान नहीं होता। घर का काम 24/7 प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की तरह होता है और वह भी बिना सैलरी और बिना किसी ब्रेक के। ऑफिस में शिफ्ट होती है, लेकिन घर के काम कभी खत्म नहीं होते।
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घर का काम भी एक फुल-टाइम जिम्मेदारी-सुचित्रा वर्मा
23 साल की सुचित्रा वर्मा का कहना है कि, घर का काम भी एक फुल-टाइम जिम्मेदारी है। बाहर की नौकरी में समय तय होता है, लेकिन घर के काम का कोई निश्चित समय नहीं होता। सुबह से लेकर रात तक खाना बनाना, सफाई करना, परिवार के हर सदस्य का ध्यान रखना और छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना। ये सब काम लगातार चलते रहते हैं। इसलिए यह कहना कि घर में कोई काम नहीं होता, बिल्कुल सही नहीं है। मुझे नहीं लगता कि घर का काम आसान होता है, क्योंकि दोनों तरह के काम अलग-अलग प्रकार की मेहनत मांगते हैं। ऑफिस में मानसिक दबाव और लक्ष्य पूरे करने की जिम्मेदारी होती है, जबकि घर के काम में शारीरिक मेहनत के साथ लगातार जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। उन्होंने ने कहा हाउसवाइफ को भी हफ्ते में कम से कम एक दिन की छुट्टी मिलनी चाहिए। उस दिन परिवार के बाकी लोग घर के काम में हाथ बंटा सकते हैं या बाहर से खाना मंगाया जा सकता है, ताकि उन्हें भी आराम मिले।
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'तुम्हें घर में कोई काम नहीं है' पूरी तरह गलत-दिलीशा जायसवाल
21 साल की दिलीशा जायसवाल का कहना है कि, घर के काम सिर्फ झाड़ू-पोंछा या खाना बनाने तक नहीं होता। महिलाओं को बच्चों की पढ़ाई, उनके भावनात्मक और शारीरिक विकास का ध्यान भी रखना पड़ता है, परिवार की दिन-प्रतिदिन की जरूरतों को पूरा करना होता है। घर के हर छोटे-बड़े फैसले में सक्रिय रहना पड़ता है। ये ऐसे काम होते हैं जो अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन इनमें बहुत मेहनत, जिम्मेदारी और धैर्य की जरूरत होती है। इसलिए यह कहना कि 'तुम्हें घर में कोई काम नहीं है' पूरी तरह गलत है। घर का काम कभी आसान नहीं होता। ऑफिस में काम के घंटे तय होते हैं, लेकिन घर में जिम्मेदारियां पूरे दिन और पूरे साल चलती रहती हैं।
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30 से 40 साल की महिलाओं की राय
36 साल की खुशबू शर्मा का क्या कहना?
36 साल की खुशबू शर्मा ने कहा कि, घर का काम भी उतनी ही मेहनत का होता है जितना कि किसी नौकरी में किया जाने वाला काम। फर्क सिर्फ इतना है कि नौकरी करने पर सैलरी मिलती है, जबकि घर का काम करने पर न तो सैलरी मिलती है और कई बार उसका सही क्रेडिट भी नहीं मिलता। घर का काम बिल्कुल आसान नहीं होता। अगर एक दिन के लिए पति को घर का पूरा काम करना पड़े, तो उन्हें भी समझ आ जाएगा कि क्या आसान है और क्या मुश्किल। इसके बाद उन्होंने कहा मेरा मानना है कि हाउसवाइफ को भी हफ्ते में एक दिन की छुट्टी जरूर मिलनी चाहिए। ऑफिस में काम करने वाले पति को तो छुट्टी मिल जाती है, लेकिन उस दिन महिलाओं का काम कई बार और बढ़ जाता है। ऐसे में संडे उनके लिए आराम का दिन बनने की बजाय और भी ज्यादा व्यस्त और थकाने वाला हो जाता है।
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घर का काम 24×7 चलने वाली जिम्मेदारी-दिव्या मिश्रा
35 साल की दिव्या मिश्रा ने कहा कि, यह एक पुरुष प्रधान सोच है कि जब पुरुष बाहर काम करते हैं तो उसे काम माना जाता है, लेकिन वहीं जब महिलाएं घर में काम करती हैं तो उसे काम नहीं समझा जाता। जबकि सच्चाई यह है कि ऑफिस में आमतौर पर 8 से 10 घंटे का काम होता है, लेकिन घर में महिलाएं कई बार 12 घंटे से भी ज्यादा काम करती हैं और संडे को तो मानो ओवरटाइम ही करना पड़ता है। घर का काम 24×7 चलने वाली जिम्मेदारी है, जिसे बिना किसी डिग्री, बिना ट्रेनिंग और अक्सर बिना किसी धन्यवाद के निभाया जाता है। इसलिए मेरा मानना है कि हफ्ते में कम से कम एक दिन घर के काम से छुट्टी जरूर होनी चाहिए, ताकि महिलाएँ भी अपने लिए समय निकाल सकें, मनचाही शॉपिंग कर सकें और बिना किसी रोक-टोक के आराम से दिन बिता सकें।
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गृहिणी को हफ्ते में एक दिन मिले आराम-रिचा सोनी
35 साल की रिचा सोनी ने कहा कि,घर का काम भले ही कम दिखाई देता हो, लेकिन वास्तव में वह बहुत ज्यादा होता है। खाना बनाना, सफाई करना, बच्चों और परिवार का ध्यान रखना ये सभी जिम्मेदारियाँ पूरे दिन चलती रहती हैं। घर के काम के लिए कोई तय समय या छुट्टी नहीं होती, इसलिए इसे आसान या कम समझना बिल्कुल सही नहीं है। जिस तरह ऑफिस में काम करने वाले व्यक्ति को आराम की जरूरत होती है, उसी तरह गृहिणी को भी हफ्ते में कम से कम एक दिन आराम मिलना चाहिए। घर और ऑफिस दोनों तरह के काम बराबर सम्मान के हकदार हैं।
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40 से 50 साल की महिलाओं का अनुभव
48 साल की सीमा सिंह का क्या कहना?
48 साल की सीमा सिंह के अनुसार घर पर कोई काम नहीं होता, क्योंकि घर में भी पूरे दिन कई तरह की जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती हैं। उनका मानना है कि ऑफिस के काम की तुलना में घर का काम थोड़ा आसान हो सकता है, लेकिन फिर भी इसमें मेहनत और समय दोनों लगते हैं। इसलिए हाउसवाइफ को भी घर के काम से हफ्ते में कम से कम एक दिन की छुट्टी जरूर मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें भी आराम करने और अपने लिए समय निकालने का मौका मिल सके।
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घर का काम कभी खत्म नहीं होता-रेनू जैन
56 साल की रेनू जैन का कहना है कि, आज के आधुनिक युग में भी कई पुरुष ऐसे हैं जो यह सोचते हैं कि महिलाएं घर में कुछ खास काम नहीं करतीं। जबकि सच्चाई यह है कि घर का काम कभी खत्म नहीं होता। ऑफिस का काम आमतौर पर सुबह से शाम तक सीमित रहता है और उसके बाद व्यक्ति घर आकर आराम कर सकता है, लेकिन महिलाओं का काम घर में पूरे दिन चलता रहता है। इसलिए यह कहना गलत है कि घर का काम आसान होता है या उसमें मेहनत नहीं लगती। मेरा मानना है कि हाउसवाइफ को भी हफ्ते में कम से कम एक दिन की छुट्टी जरूर मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें भी आराम करने और अपने लिए समय निकालने का मौका मिल सके।
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छुट्टी या हाफ डे जैसी कोई व्यवस्था नहीं-संगीता मिश्रा
58 साल की संगीता मिश्रा ने कहा कि, घर के काम की वास्तविकता को समझ न पाने का परिणाम है। हकीकत यह है कि गृहकार्य भी उतना ही महत्वपूर्ण, श्रमसाध्य और जिम्मेदारी भरा होता है जितना किसी ऑफिस का काम। एक गृहिणी सुबह से लेकर रात तक लगातार काम करती है भोजन बनाना, घर की सफाई करना, बच्चों की देखभाल करना, बुजुर्गों की सेवा करना, परिवार के हर सदस्य की जरूरतों का ध्यान रखना और घर के छोटे-बड़े प्रबंधन को संभालना। घर के काम किसी तय समय में बंधे नहीं होते और इनमें छुट्टी या हाफ डे जैसी कोई व्यवस्था भी नहीं होती।
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महीने में भी एक दिन की छुट्टी नहीं मिलती-कविता वैश्य
50 साल की कविता वैश्य का कहना है कि, घर का काम बिल्कुल आसान नहीं होता। पुरुष भले ही 10 से 15 घंटे की नौकरी करते हैं, लेकिन उसके बाद वे उस काम से फ्री हो जाते हैं, जबकि महिलाओं का काम 24 घंटे चलता रहता है और वे उससे कभी पूरी तरह मुक्त नहीं हो पातीं। घर का काम भी उतना ही कठिन होता है जितना बाहर का काम। ऑफिस में सहयोगियों का साथ और मदद मिलती है, लेकिन घर के काम अक्सर महिलाओं को अकेले ही करने पड़ते हैं। महिलाओं को घर के काम से सातों दिन तो क्या, कई बार महीने में भी एक दिन की छुट्टी नहीं मिलती, जबकि उन्हें भी आराम का हक होना चाहिए।
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सोच बदलने की जरूरत
तीनों पीढ़ियों की महिलाओं के जवाब अपने अलग-अलग अनुभवों से जुड़े थे। लेकिन तीनों पीढ़ियों में एक बात कॉमन थी। सभी ने माना कि, घर का काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बाहर का काम। महिला दिवस सिर्फ शुभकामनाएं देने का दिन नहीं, बल्कि यह समझने का भी दिन है कि घर और समाज दोनों को चलाने में महिलाओं की भूमिका कितनी बड़ी है। जरूरत इस बात की है कि हम घर के काम को भी ‘काम’ मानें, उसका सम्मान करें और जिम्मेदारियों को मिल-जुलकर निभाएं।
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