इंडिगो एयरलाइंस संकट: कंपनी की मनमानी या DGCA की चूक, आखिर कौन है हवाई यात्रियों की फजीहत का जिम्मेदार ?

देश में लाखों हवाई यात्रियों को इंडिगो एयरलाइन के कुप्रबंध (Indigo Flight Crisis) के कारण बदतर हालात का सामना करना पड़ा है। गंभीर अव्यवस्था क्यों और कैसे हुई ?

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अनिल श्रीवास्तव, एविएशन एक्सपर्ट

Indigo Flight Crisis: देश में पिछले कई दिनों से लाखों हवाई यात्रियों को इंडिगो एयरलाइन के कु-प्रबंध (Indigo Flight Crisis) के कारण बदतर हालात का सामना करना पड़ा है।

दिसंबर के पहले हफ्ते से इंडिगो की फ्लाइट अचानक कैंसल होने से लाखों घरेलू और विदेशी यात्री एयरपोर्ट पर फंसकर भोजन-पानी तक के लिए तरस गए। इस अव्यवस्था का फायदा दूसरी एयरलाइंस ने यात्रियों से दस गुना तक ज्यादा किराया वसूलकर उठाया।

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इंडिगो फ्लाइट्स कैंसिल होने के बाद परेशान यात्री

घरेलू एविएशन सेक्टर में यह गंभीर अव्यवस्था क्यों और कैसे हुई और कौन इसका गुनहगार है ? ये जानने के लिए बंसल न्यूज (डिजिटल) के संपादक सुनील शुक्ला ने एविएशन एक्सपर्ट और सिविल एविएशन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) में लंबे समय तक ज्वाइंट सेक्रटरी एवं नीति आयोग के प्रमुख सलाहकार रहे अनिल श्रीवास्तव (Aviation Expert Anil Srivastava) से खास चर्चा की। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।



सवाल:घरेलू एविएशन सेक्टर में यह अभूतपूर्व संकट क्यों हुआ और आप इसके लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं ?

अनिल श्रीवास्तव: ऐसा नहीं है कि एविएशन सेक्टर के इस संकट का पूर्व अनुमान नहीं लगाया जा सकता था। इसका आंकलन पहले से भी किया जा सकता था। समय-समय पर लगातार स्टेप्स लिए जाते रहने चाहिए थे। एविएशन में सुरक्षा के लिए जरूरी एफडीटीएल (Flight Duty Time Limitation) के नियमों को हर एयरलाइंस को एक पूर्व निश्चित टाइम लिमिट में लागू करना था। जिस एयरलाइंस ने समय रहते इसका पालन नहीं किया, उसका सीधा कारण कंपनी की ऑपरेशन कॉस्ट को कम करना और कंपटीशन में बने रहना हो सकता है। इसे ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश भी माना जा सकता है। 

एफडीटीएल (FDTL) अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक हैं, जो सिविल एविएशन रूल्स कहलाते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि एयरलाइंस कंपनियां एयरक्राफ्ट उड़ाने वाले पायलट और कैबिन क्रू का काम करने वाले स्टाफ से इतनी मेहनत न करवाएं कि जिससे उन्हें काम का ज्यादा या अधिक दबाव (स्ट्रेस) महसूस हो। वे आगे की ड्यूटी ठीक से न कर सकें। इसलिए उनकी ड्यूटी की टाइम लिमिट सेट की गई है। इसका पालन डीजीसीए यानी डायरेक्टर जनरल, सिविल एविएशन (DGCA) करवाते रहते हैं। अधिकांश एयरलाइंस इसका पालन करती हैं। लेकिन अभी यह बात सामने आई है कि इंडिगो एयरलाइंस द्वारा इसका पालन नहीं किया गया। कहीं कुछ चूक रही है जिसकी वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई।

Flight Duty Times Limitations
FDTL के नए नियम जो इंडिगो संकट के बाद DGCA को वापस लेने पड़े

सवाल:यात्रियों की सुरक्षा के लिए FDTL अनिवार्य हैं तो आपको इसे लागू कराने में किसकी चूक ज्यादा लगती है इंडिगो या डीजीसीए की ? 

जवाब: जब सभी एविएशन कंपनियों को 1 जुलाई से FDTL लागू करने का समय दिया गया था तो इंडिगो को इसे समय पर इंप्लीमेंट करना चाहिए था। यदि इंप्लीमेंट करने में कठिनाइयां थीं तो, थोड़ा समय और दिया जा सकता था। कंपनी और DGCA के बीच बातचीत होती रहनी चाहिए थी। कैसे एक बीच का रास्ता निकलेगा। ऐसा है कि फ्लाइट कैप्टंस और पायलट हमेशा मांग के अनुरूप मार्केट में उपलब्ध नहीं रहते हैं। उनके जो बायलॉज है, अवेलेबिलिटी और मॉनिटर रहती है। दोनों ही अपनी सिक्योरिटी से कंप्रोमाइज ना करें। भारत में जितने भी मेंबर स्टेट्स हैं, जिनमें से भारत भी है। इसके पालन करने के लिए उनके लिए मैंडेटरी है। क्योंकि सिविल एविएशन एक इंटरनेशनल है। डीजीसीए ने एक डेडलाइन दी थी तो उस डेडलाइन का पालन होना चाहिए था।

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इंडिगो का मार्केेट शेयर सबसे ज्यादा

सवाल:कहा जा रहा है कि इंडिगो का क्षमता से ज्यादा मार्केट शेयर (करीब 60%) कब्जा भी है। यहां तक कि अमेरिका या यूरोप में भी किसी भी एयरलाइन का मार्केट शेयर 25% से ज्यादा नहीं हैं ? 

जवाब: भारत का एविएशन सेक्टर अभी दुनिया में फास्टेस्ट ग्रोइंग मार्केट है। पिछले करीब दस साल से ऐसा चल रहा है। पूरे विश्व में हमारा पैसेंजर ग्रोथ रेट सबसे ज्यादा है। इसको ध्यान में रखकर पॉलिसीज बनाने की जरूरत है, जो किसी भी तरीके से मार्केट में मोनोपॉलिस्टिक सिचुएशन को जन्म ना दें। यह विशेष रूप से पॉलिसी मेकर्स, डिसीजन मेकर्स को ध्यान में रखने वाली बात है। अगर कोई नई एयरलाइंस ग्रो कर रही है, तो उसे ऐसे इकोसिस्टम प्रोवाइड किया जाए, जिससे वह और ग्रो कर सकें। इंडिगो अपनी कार्य प्रणाली की वजह से मार्केट में इतना बड़ा शेयर हासिल कर सकी है। इंडिगो ने नागरिकों को अच्छी सेवाएं भी दी हैं। यदि कोई एयरलाइंस तेजी से ग्रो कर रही है तो उस पर निरंतर सही निगरानी भी रखी  जानी चाहिए। रेगुलेटर के रूप में डीजीसीए और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री दोनों हैं, उन्हें देखना चाहिए कि किसी एयरलाइंस के ऑपरेशन में क्यों मुश्किलें आ रही हैं। उससे यात्रियों के लिए जरूरी सेफ्टी नार्म्स का पालन करवाया जाना भी बहुत जरूरी है।

सवाल:FDTL के नियमों का पालन तो सभी एयरलाइंस के लिए अनिवार्य किया गया है, लेकिन इससे इंडिगो की व्यवस्था बेपटरी हुई, जबकि एयर इंडिया और आकासा जैसी दूसरी कंपनियां प्रभावित नहीं हुईं ?  

जवाब: FDTL के जो नॉर्म्स हैं, वो सभी कंपनियों के लिए हैं। यह प्राथमिक रूप से एविएशन की सेफ्टी से रिलेटेड हैं। मुझे ऐसा लगता है कि बाकी कंपनीज उसको फॉलो कर रही होंगी, तभी उनके लिए यह स्थिति नहीं बनी। उनको ऑपरेशंस बंद नहीं करने पड़े। कंपनी को अपनी सभी फ्लाइट्स को ऑपरेट करने के लिए कितने पॉयलट और अन्य क्रू की जरूरत है, समय पर इसे सुनिश्चित करना जरूरी है। शायद यह सुनिश्चत नहीं किया गया, जिस वजह से यह स्थिति बनी कि इंडिगो को अपनी 50 फीसदी से भी ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।

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इंडिगो की 50 फीसदी से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल

सवाल: क्या DGCA को यह निगरानी नहीं करनी चाहिए कि कंपनी के पास FDTL के रूल्स के अनुसार फ्लाइट ऑपरेशंस के लिए जरूरी पायलट और अन्य स्टाफ है या नहीं ?  

जवाब: इस बारे में कुछ कह पाना संभव नहीं होगा, जब तक कि आंकड़े सामने ना हो। एयरलाइंस जिस तरीके से फ्लाइट ऑपरेशंस के लिए अपनी प्लानिंग करती है। मेरे विचार से रेगुलेटर्स को भी पूरा आंकड़ा अपने पास रखते हुए इस चीज की मॉनिटरिंग जरूर करना चाहिए। किस एयरलाइंस के पास कितनी फ्लाइट्स हैं, कितने घंटे की फ्लाइंग है और उसके लिए जरूरी कितना स्टाफ उनके पास है। अब ये कह पाना मुश्किल है कि वास्तविक स्थिति क्या थी या किन कारणों से यह स्थिति डेवलप हुई या फिर क्या इसके पीछे कुछ और इंटेंशन रहा है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में फ्लाइट्स का कैंसिलेशन भी इंडिकेट करता है कि कहीं ना कहीं मैनेजेरियल कमी भी रही है। 

सवाल:देश में दोबारा से यह अव्यवस्था न हो, यात्री इतने परेशान न हों, इसके लिए क्या सबक और कहां सुधार करने की जरूरत है ? 

जवाब: डीजीसीए जैसे रेगुलेटर्स और मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन को थोड़ा और ज्यादा प्रोएक्टिव होना पड़ेगा। इसे सिर्फ निजी कंपनियों के भरोसे पर छोड़ देना सही नहीं है। हमारे देश का सिविल एविएशन सेक्टर अभी ऐसा नहीं है कि उसको पूरी तरीके से स्वतंत्र छोड़ा जा सके। चूंकि एविएशन सेक्टर की ग्रोथ बहुत फास्ट है, हमारे पास डिमांड के अनुसार एयरक्राफ्ट भी उपलब्ध नहीं है। जिस रफ्तार से हम ग्रो कर रहे हैं उसके लिए मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है।  साथ में यह भी कोशिश की जाए कि एक हेल्दी इकोसिस्टम बने, जिसमें यदि कोई इंवेस्टर, एविएशन सेक्टर में इन्वेस्ट करके ग्रो करना चाहता है या आगे बढ़ना चाहता है तो उसको एक अच्छा लेवल प्लेइंग इकोसिस्टम मिले और कोई निजीकरण का बेजा फायदा न उठा पाए।

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