Coronavirus Update: रिसर्च में हुआ खुलासा, संक्रमण से ठीक होने के बाद जीवन भर कोरोना से बचाएगी एंटीबॉडीज!

Mild Covid

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया इस वक्त परेशान है। ऐसे में एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। वॉशिगंटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना के लक्षण दिखे है और वो इससे ठीक हो गया है तो इस स्थिति में उसका शरीर कोरोना वायरस से हमेशा के लिए लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। यानी कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी हमेशा बनती रहेंगी। शोध में ये भी पाया गया है कि कोरोना संक्रमण के पहले लक्षण के 11 महीने बाद फिर से एंटीबॉडी विकसित हो रही है।

एंटीबॉडी जीवन भर चलेगी

इस रिसर्च पेपर को साइंस जर्नल ‘नेचर’ में 24 मई को प्रकाशित किया गया है। रिसर्च में बताया गया है कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने के कुछ महीनों के बाद भी एंटीबॉडी कोशिकाएं लोगों में वायरस से लड़ने का काम करती रहती हैं। साथ ही ये कोशिकाएं कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित भी करती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीबॉडी जीवन भर मरीज के शरीर में रह सकती है। ऐसे में अगर आप एक बार संक्रमण से ठीक हो गए तो पूरे जीवनकाल के दौरान ये प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी और आप कोरोना वायरस से संघर्ष कर सकेंगे।

संक्रमण के बाद एंटीबॉडी कम होते हैं

वॉशिगंटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर और इस स्टडी के लेखक अली एलबेडी ने कहा कि कोरोना वायरस की पहली लहर यानी पिछले साल गर्मियों के दौरान ऐसी खबरें आई थीं कि संक्रमण के बाद एंटीबॉडी ज्यादा दिनों तक के लिए शरीर में नहीं रहती। लेकिन ये सच नहीं है। एलबेडी का मानना है कि संक्रमण के बाद एंटीबॉडी कम होते हैं, इम्यूनिटी भी कमजोरी होती है लेकिन समय के साथ वापस ये रिकवर कर लेते हैं। संक्रमण के बाद इम्यूनिटी कम होना आम बात है। लेकिन ये कहना की इम्यूनिटी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है ये गलत है।

ऐसे काम करती है एंटीबॉडी

शोध में पाया गया है कि संक्रमित होने के 11 महीने बाद लोगों के शरीर में एंटीबॉडी बन रही है और ये एंटीबॉडी सेल्स जीवनभर के लिए लोगों को कोरोना से बचाने में मदद करेंगी। संक्रमण का जैसे ही शरीर पर फिर से हमला होगा ये वापस जाग जाएगी और समय रहते लोग ठीक हो जाएंगी। अली एलबेडी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान जो एंटीबॉडी विकसित होते हैं वो इम्यून सेल्स को बांटती हैं। यानी विभाजित करती हैं। ये धीरे-धीरे ऊतकों और खून में पहुंच जाती हैं। इससे एंटीबॉडी का स्तर शरीर में तेजी से बढ़ता है। ये एंटीबॉडी जिन कोशिकाओं से बनती हैं उन्हें प्लाज्मा सेल्स कहते हैं। प्लाज्मा सेल्स हड्डियों में मौजूद बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा में जाकर रहती हैं। हालांकि इनकी संख्या कम हो जाती है। लेकिन जैसे ही शरीर में वायरस का आक्रमण होता है ये सक्रिय हो जाती हैं। तेजी से विभाजित होकर अपनी संख्या बढ़ा लेती हैं और वायरस से युद्ध करने लगती हैं।

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