Coronavirus New Update: कोरोना से ठीक होने के बाद ‘ब्रेन फॉग’ के शिकार हो रहे हैं लोग, 35 फीसदी मरीजों में दिख रहे लक्षण

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नई दिल्ली। 35 फीसदी लोग कोरोना से तो ठीक हो जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद ‘ब्रेन फॉग’ जैसी दिमागी बीमारी के शिकार हो जा रहे हैं। दरअसल, कोरोना के दौरान शरीर में बने साइटोकाइन स्टार्म तंत्रिका तंत्र पर घातक असर छोड़ रहा है। इस कारण से लोग दिमागी बीमारी के चपेट में आ जा रहे हैं। कोरोना से रिकवर हुए लोगों के सामने नए न्यूरोलोजिकल डिसआर्डर उभरने की आशंका खड़ी हो गई है। लोग अब याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता खो रहे हैं।

कोविड के कारण लोगों का तंत्रिका तंत्र घायल

मेरठ मेडिकल कालेज के न्यूरोसाइकेट्री विभाग में ऐसे लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं जो पोस्ट कोविड के मरीज हैं। इन मरीजों में मेमोरी लॉस, चिड़चिड़ापन, निर्णय लेने में कमी आदि जैसे रोग पाए जा रहे हैं। कोरोना के कारण साइटोकाइन स्टार्म से न सिर्फ फेफड़े, हार्ट, किडनी व अन्य अंगों पर घातक असर पड़ा, बल्कि तंत्रिका तंत्र भी चोटिल हुआ है। जिनके शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ तेजी से एंटीबाडी बनी ऐसे मरीजों के शरीर में ब्रेन फॉग ज्यादा मिला।

पोस्ट कोविड मरीज केवल 18-24 अंक ही जुटा पा रहे हैं

मेरठ मेडिकल कालेज ने ऐसे मरीजों के मेंटल स्टेटस स्केल की जांच की। इस टेस्ट में खई प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं। किसी भी व्यक्ति को इस टेस्ट में 30 अंक पाना होता है।, लेकिन पोस्ट कोविड मरीज केवल 18-24 अंक ही जुटा पा रहे हैं। इसी टेस्ट से ‘ब्रेन फॉग’ का नाता है। दरअसल, दिमाग से जुड़ी परेशानियों या दिक्कतों को डॉक्टर ब्रेन फॉग मानते हैं। इसमें केंद्रीय तंत्रिका सही तरीके से काम नहीं करती है। व्यक्ति की चेतना बार-बार बाधित होती है, जिसकी वजह से उसमे मानसिक थकान व दुविधा की स्थितियां पैदा होती हैं। ब्रेन फॉग ध्यान और याद्दाश्त को भी प्रभावित करती है। ब्रेन फॉग से प्रभावित व्यक्ति उचित निर्णय नहीं ले पाता।

इस कारण से होता है ब्रेन फॉग

ब्रेन फॉग को लेकर न्यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों में ब्लड क्लॉट यानी नसों में खून के थक्के जमना इसका कारण हो सकता है। संक्रमण होने पर शुरुआत में फेफड़ों और गले में सूजन आती है और संक्रमित होने के कुछ दिनों के अंदर मरीज का ब्लड गाढ़ा होने लगता है। ये सब कोरोना वायरस की प्रवृत्ति के कारण होता है। जिसका मरीजों को पता नहीं चल पाता। रक्त संचार के दौरान शिराओं में खून के थक्के जमने से दिक्कतें शुरू हो जाती है।

इस बीमारी से कैसे बचे

ब्रेन फॉग से बचने के लिए छह-आठ घंटे की नींद लें। इससे तंत्रिका तंत्र की मरम्मत होती है। साथ ही शराब व अन्य नशों से बचें। नियमित योगाभ्यास करें, इससे दिमागी क्षमता बढ़ती है। अंकुरित अनाज, फल, व हरी सब्जियां खाएं। वसायुक्त व मसालेदार चीजों से बचें। सामाजिक कार्यों में भागीदारी रखें। आपसी संवाद बढ़ाएं।

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