coronavirus: पहले कोरोना वायरस से बचाएगा, फिर पेड़ बनकर ऑक्सीजन देगा यह मास्क

corona and mask

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से बचने के लिए डॉक्टर मास्क पहनने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि महामारी से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और घर में रहने के साथ मास्क बहुत जरूरी है। हालांकि मास्क पहनने को लेकर कई लोग लापरवाही भी करते हैं और कई पहनते हैं तो उसे जहां-तहां फेंक देते हैं। लेकिन अब एक कंपनी ने ऐसा मास्क तैयार किया हा जो लोगों को महामारी से तो बचाएगी ही साथ ही फेंके गए मास्क से पर्यावरण की रक्षा भी करेगा।

पेपर सीड कंपनी ने इस मास्क को तैयार किया है

इस मास्क को कर्नाटक की कंपनी पेपर सीड ने तैयार किया है। जिसे यूज करने के बाद जब हम फेंक देंगे तो ये बाद में पेड़ में बदल जाएगा। मास्क का बाहरी हिस्सा कॉटन पल्प से बना होता है। जिसे अलग-अलग तरह के स्‍क्रैप मैटेरियल को इकट्ठा करके तैयार किया जाता है। इस स्‍क्रैप को गारमेंट इंडस्‍ट्री से इकट्ठा किया जाता है। वहीं अंदर की पर्त में सॉफ्ट कॉटन कपड़े का प्रयोग होता है।

कंपनी 2017 से रिसाइकिल उत्पादों को तैयार करती है

पेपर सीड को शुरू करने वाले नितिन वास कहते हैं कि यह सॉफ्ट कॉटन इतना थिक होता है कि किसी भी तरह के संक्रमण से लोगों को बचा सकता है। 2017 से ही नितिन की कंपनी रिसाइकिल उत्‍पादों को तैयार कर रही है। महामारी के बाद कंपनी ने नया प्रयोग किया और अब ये हिट हो गया है। बतादें कि मास्क कॉटन के जरूर बने हैं लेकिन बस एक बार प्रयोग के लिए ही बने हैं। इसे एक बार प्रयोग करने के बाद आप मिट्टी में फेंक दें और रोजाना पानी डाले। कुछ दिनों बाद आप मास्क में से एक पौधा निकलते देख सकते हैं।

लंबी प्रक्रिया के बाद मास्क को तैयार किया जाता है

इस एक मास्‍क की कीमत करीब 25 रुपए है। बतादें कि एक लंबी प्रक्रिया और मेहनत के बाद इस मास्क को तैयार किया जाता है। खास बात ये है कि इस मास्क को पूरी तरह से हाथ से ही तैयार किया जाता है। एक मास्क को बनाने में करीब 8 घंटे लगता है। साथ ही मास्क को सूखने में करीब 12 घंटे लगते हैं। जब कि हर मास्क को स्टेंसिल से काटा जाता और फिर उसकी सिलाई की जाती है। मास्क के अंदर पौधों के बीज रखे होते हैं। जिसे फेंकने के बाद पेड़ बनते हैं।

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