Coronavirus Effect: ब्रिटेन की स्थिति भारत से भी बदतर थी, जानिए फिर कैसे उन्होंने इस विनाश को रोका -

Coronavirus Effect: ब्रिटेन की स्थिति भारत से भी बदतर थी, जानिए फिर कैसे उन्होंने इस विनाश को रोका

Coronavirus Effect

नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर से भारत में हहाकार मचा हुआ है। लेकिन भारत अकेला देश नहीं है जो इस स्थिति में फंसा है। इससे पहले भी कई देशों में कोरोना ने कोहराम मचाया है। आज जो स्थिति भारत की है, पिछले साल दिसंबर में यही स्थिति UK की थी। लेकिन सबसे जरूरी बात, आखिर ब्रिटेन ने कैसे इस महामारी पर काबू पाया? आइए जानने की कोशिश करते हैं।

99 फीसद मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं

ब्रिटेन के विशेषज्ञ कहते हैं कि 99 फीसद मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं। केवल 1 प्रतिशत मरीज को ही अस्पताल जाने की नौबत आती है। हालांकि जो 99 फीसद मरीज होते हैं उन्हें इस दौरान कुछ खास चीजों पर ध्यान रखने की जरूरत है। जैसे- ऑक्सीजन लेवल पर नजर बनाए रखें और सुनिश्चित करें कि ये लेवल 93 से कम ना हो। बुखार और बदन दर्द के लिए हमेशा पेरासिटामोल अपने पास रखें। साथ ही होम आइसोलेशन ऐसा रखें कि किसी भी हालत में आपसे कोई संपर्क में ना आए।

चिकित्सा संसाधनों का गलत इस्तेमाल न हो

इसके साथ ही जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 93% से उपर है उन्हें कोई और दवा या इलाज नहीं लेना चाहिए। प्लाज्मा, रेमडेसिविर, आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड, ब्लड थिनर या टोक्लीजुमाब देने की कोई जरूरत उन्हें पड़ती है, जिनका ऑक्सीजन लेवल 93% से नीचे चला जाता है। विशेषज्ञों की माने तो चिकित्सा संसाधनों (अस्पताल के बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि) का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि कई लोग पैसे, संपर्क और रुतबे के दम पर इन्हें हासिल कर लेते हैं। इससे गंभीर रोगियों की स्थिती पर प्रभाव पड़ता है।

UK के अस्पतालों को करना पड़ा था बंद

आज जो स्थिति ऑक्सीजन को लेकर भारत में है। वहीं स्थिति कभी ब्रिटेन की थी और कई अस्पतालों को ऑक्सीजन की कमी के कारण बंद करना पड़ा था। ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि ऑक्सीजन को लेकर हड़बडी ना दिखाएं। हमें कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जो 93-94 से उपर होना चाहिए। लेकिन अक्सर लोग इस स्तर को ज्यादा रखने के लिए, ऑक्सीजन का गलत इस्तेमाल करते हैं। हमें इस आदत से बचना चाहिए।

वैक्सीन से जीती लड़ाई

ब्रिटेन के डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन आने से पहले लंदन के सारे आईसीयू बेड भरे हुए थे। लेकिन वैक्सीन लगने के बाद अब शायद ही किसी मरीज को ICU में भर्ती किया गया है। इसके साथ ही डॉक्टर कोरोना से लड़ने के लिए सख्त लॉकडाउन को भी एक प्रमुख कारण मानते हैं।

केवल आवश्यक लोगों को ही अस्पताल में भर्ती कराया गया

इसके अलावा बिट्रेन में अस्पतालों ने एक सख्त नियम बनाया था। जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं थी उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। इससे हुआ ये कि जिन मरीजों को वास्तव में अस्पताल की जरूरत थी। उन्हें वहां बेहतर इलाज मिल सका।

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