Congress: कांग्रेस सांसद ने ही उठाए कमलनाथ की कार्यशैली पर सवाल, बोले- यह काम करते तो नहीं गिरती सरकार…

भोपाल। प्रदेश में लंबे समय और कठिन प्रयासों के बाद आई कांग्रेस सरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाते ही गिर गई थी। कमलनाथ के सालों के प्रयास पर सरकार गिरते ही पानी फिर गया था। अब सरकार गिरने के करीब एक साल बाद उनकी पार्टी के ही वरिष्ठ नेता कमलनाथ की जिम्मेदारी की तरफ इशारा कर रहे हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने ही कमलनाथ की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। तन्खा ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर कमलनाथ सीएम रहते व्यापम, ई-टेंडरिंग, हनीट्रैप जैसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई करते तो भाजपा की हिम्मत नहीं पड़ती। दरअसल हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा था कि कांग्रेस सरकार के समय भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज कराए गए केस वापस लिए जाएंगे।

इसको लेकर तन्खा ने भी जवाब दिया है। तन्खा ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि मेरा तो यह दर्द है कि कमलनाथ अगर सही मुकदमों पर समय रहते कार्रवाई कर लेते तो शायद सरकार नहीं गिरती। तन्खा ने ट्वीटर पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि मुझे पता है व्यापम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, ई-टेंडरिंग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, हनीट्रैप पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इतने बड़े-बड़े टेंडर में हेराफेरी हुई है, इन कामों में कई बड़े अधिकारी और लोग शामिल थे। यदि रत्तीभर भी कार्रवाई होती तो भाजपा सरकार गिराने की हिम्मत नहीं करती।

यह बोले तन्खा…
तन्खा ने वीडी शर्मा के बयान का जवाब देते हुए कहा कि शर्मा जी मैं आपकी बात से सहमत हूं। जो भी झूठे केस हैं उन्हें आप बिल्कुल वापस लीजिए। लेकिन बदले की राजनीति कांग्रेस की संस्कृति नहीं रही है। झूठे तो दूर की बात है, अगर कमलनाथ ने अपनी सरकार के समय सही प्रकरणों पर कार्रवाई की होती तो कांग्रेस की सरकार नहीं गिरती। जब कमलनाथ को 2018 में कमान सौंपी गई तो उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों में सामंजस्य कराते हुए पहले प्रदेश में कांग्रेस की वापसी कराई।

लेकिन अपनी सरकार में अनसुनी को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई नेता नाराज हो गए। नतीजा यही हुआ कि प्रदेश से कांग्रेस की सरकार गिर गई। बता दें कि मप्र में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लंबे समय बाद सत्ता में वापसी की थी। इसके बाद लंबे समय तक कांग्रेस में रहे दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 विधायकों समेत भाजपा में शामिल हो गए थे। इस कारण यहां कांग्रेस की सरकार गिर गई थी।

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