परिसर की तलाशी का मामला : अदालत ने अधिवक्ता प्राचा की याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने अधिवक्ता महमूद प्राचा के परिसर की पिछले महीने हुई तलाशी के दौरान के वीडियो फुटेज की प्रति तत्काल मुहैया कराने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देश देने से मना कर दिया।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा के मामले में कुछ आरोपियों की तरफ से पेश होने वाले अधिवक्ता प्राचा ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ सत्र अदालत का रुख किया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान प्राचा की याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने वीडियो फुटेज मुहैया कराने के उनके अनुरोध को ना तो ठुकराया, ना ही उस पर कोई अंतिम राय दी।

न्यायाधीश राणा ने कहा कि निचली अदालत ने वीडियो फुटेज मुहैया कराने के संबंध में अर्जी का निपटारा नहीं किया और यह अंतिम फैसला नहीं दिया गया।

सत्र न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं अतिरिक्त लोक अभियोजक से सहमत हूं कि मौजूदा पुनरीक्षण याचिका कानूनी तौर पर विचार योग्य नहीं है। उपरोक्त चर्चा को देखते हुए मौजूदा पुनरीक्षण याचिका खारिज की जाती है।’’

मजिस्ट्रेट अदालत ने 27 दिसंबर को अपने आदेश में दिल्ली पुलिस को वीडियो फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट उद्धव कुमार जैन ने हालांकि इस पर कोई आदेश नहीं दिया था कि वीडियो की एक प्रति प्राचा को देनी है या नहीं। संबंधित अदालत आगे 12 जनवरी को मामले पर सुनवाई करेगी। अदालत के पूर्व के आदेश के जवाब में जांच अधिकारी ने वीडियो फुटेज पेश किया था।

प्राचा ने कहा था कि 24 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से 25 दिसंबर को तड़के करीब तीन बजे तक उनके कार्यालय की तलाशी ली गयी थी और कानून के मुताबिक जांच अधिकारी को तलाशी और जब्त सामग्री के बारे में संबंधित मजिस्ट्रेट को सूचना देनी चाहिए थी।

उन्होंने अपनी दलील में कहा कि लेकिन ऐसा नहीं किया गया जिस कारण से उन्होंने याचिका दायर की है।

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्राचा ने जाली कागजात तैयार किया और एक व्यक्ति को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा से जुड़े मामले में फर्जी गवाही के लिए प्रेरित किया।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप

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