Coldrif Syrup: प्रोपलीन ग्लायकॉल उपयुक्त नहीं था, फिर भी बिना जांच सिरप बनाया, तय मात्रा से 486 गुना ज्यादा मिला DEG, EG

Coldrif Syrup Chhindwara: ​मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में कोल्ड्रिफ सिरप से 19 मौतें हुई है। तमिलनाडु के डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की जांच रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है।

Coldrif Syrup

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हाइलाइट्स

  • डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की जांच रिपोर्ट
  • फैक्टरी में नहीं मिला प्रोपलीन ग्लायकॉल
  • केमिकल का कोई रिकार्ड भी नहीं मिला

Coldrif Syrup Chhindwara: ​मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में कोल्ड्रिफ सिरप से 19 मौतें हुई है। तमिलनाडु के डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की जांच रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है।

तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल कंपनी में जिस प्रोपलीन ग्लायकॉल का सिरप बनाने में उपयोग किया गया था, ​तमिलनाडु के डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की जांच में उसे उपयुक्त नहीं पाया है।

तमिलनाडु के डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि शुद्धता की बिना जांच के सिरप बनाने में इसका उपयोग किया गया। सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) की मात्रा तय सीमा से 486 गुना अधिक पाई गई। जिसकी 589 बोतलें छिंदवाड़ा में सप्लाई करने के लिए तैयार कर रखी थी।

[caption id="attachment_910745" align="alignnone" width="1263"]Chhindwara Cough Syrup Case मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में कोल्ड्रिफ सिरप से 19 मौतें हुई है।[/caption]

100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल की खरीदा था

कंपनी के मालिक ने मौखिक रूप से बताया कि 25 मार्च 2025 को चेन्नई की सनराइज बायोटेक से प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था। दो बार में कुल 100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदी के कंपनी के पास बिल मिले न इसका कोई रिकॉर्ड दर्ज है। भुगतान भी नकद और जी-पे से किया था।

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स्वास्थ्य मंत्री ने किया नागपुर का दौरा

स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने नागपुर का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में कफ सिरप से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने डॉक्टरों की टीम के साथ चर्चा की और उन्हें सर्वोत्तम संभव उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

[caption id="attachment_910882" align="alignnone" width="1209"]Coldrif Syrup स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने नागपुर का दौरा किया।[/caption]

सिरप बनाने लायक नहीं था यह केमिकल

घटिया गुणवत्ता के प्रोपलीन ग्लायकॉल से यह सिरप बनाया था, जो नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल था। इसका कोई लैब परीक्षण तक नहीं कराया गया। सिर बनाने में इसका इस्तेमाल किया गया। सिर में इसकी मात्रा इतनी ज्यादा मिली कि यह बड़े से बड़े जीव की किडनी और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

589 बोतलें छिंदवाड़ा में सप्लाई के लिए तैयार थी

जांच टीम को श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स से कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) की 60 एमएल की 589 बोतलें बरामद हुईं, जो छिंदवाड़ा भेजी जानी थीं। इसी बैच की सिरप पीने से बच्चों में किडनी फेलियर और ब्रेन में सूजन जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हुईं, जिसके कारण उनकी मौत हुई। यह सिरप मई 2025 में तैयार की गई थी और इसकी एक्सपायरी डेट अप्रैल 2027 बताई गई है।

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