CM Bhupesh Baghel: गौ संरक्षण और संवर्धन का काम किसानों के जीवन में बदलाव लाने की मुहिम का हिस्सा

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल CM Bhupesh Baghel ने कहा है कि गौ सेवा हमारे लिए कोई नारा नहीं, हमारा कर्तव्य है। छत्तीसगढ़ में गौ संरक्षण और संवर्धन का काम किसानों के जीवन में बदलाव लाने की मुहिम का एक हिस्सा है

CM Bhupesh Baghel: गौ संरक्षण और संवर्धन का काम किसानों के जीवन में बदलाव लाने की मुहिम का हिस्सा

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल CM Bhupesh Baghel ने कहा है कि गौ सेवा हमारे लिए कोई नारा नहीं, हमारा कर्तव्य है। छत्तीसगढ़ में गौ संरक्षण और संवर्धन का काम किसानों के जीवन में बदलाव लाने की मुहिम का एक हिस्सा है। राज्य सरकार ने सुराजी गांव योजना के तहत नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी, गौठानों के निर्माण और गोधन न्याय योजना के माध्यम से इस दिशा में प्रभावी पहल की है।

नवनियुक्त पदाधिकारियों ने किया पदभार ग्रहण

मुख्यमंत्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के नवनियुक्त पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

ये रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री निवास में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे और छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन और कार्यक्रम स्थल पर खाद मंत्री अमरजीत भगत, विधायक मोहित राम केरकेट्टा और उत्तरी जांगड़े, छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत श्रीराम सुंदर दास सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

दूरी को कम करने का प्रयास किया
मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बीते ढ़ाई वर्षों में छत्तीसगढ़ में गोधन संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं, जो पूरे देश के लिए आज उदाहरण बन चुके हैं। मशीनीकरण के दौर में कृषि और पशुपालन के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार ने सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना और रोका-छेका अभियान जैसे कदमों से इस दूरी को कम करने का प्रयास किया है।

आय का नया जरिया खोल दिया
कृषि और पशु पालन की ओर लोगों की रूचि बढ़ी है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य जहां दो रूपए किलो में गोबर की खरीदी हो रही हैं। इस योजना में किसानों, पशुपालकों और वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन में लगी स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए आय का नया जरिया खोल दिया है। इससे डेयरी व्यवसाय को नया जीवन मिला है। गौठानों में पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही यहां पशुओं के स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल भी हो रही है। रोका-छेका की पुरानी परम्परा को लेकर गांवों में जागृति आई है। खुले में घुमने वाले पशु कम ही दिखते हैं।

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