मप्र सरकार ने माना: रासायनिक टॉक्सिसिटी से हुई छिंदवाड़ा की घटना, डॉक्टरों को प्रिस्क्रिप्शन में बरतनी होगी सावधानी

Chhindwara Cough Syrup Case: मध्यप्रदेश सरकार ने मान लिया है कि रासायनिक टॉक्सिसिटी से छिंदवाड़ा की घटना हुई है। NHM की बैठक में कहा गया कि डॉक्टरों को प्रिस्क्रिप्शन में सावधानी बरतनी होगी।

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हाइलाइट्स

  • छिंदवाड़ा कप सिरप केस
  • MP सरकार का सख्त रुख
  • रासायनिक टॉक्सिसिटी से गई बच्चों की जान

Chhindwara Cough Syrup Case: छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से 16 मासूमों की मौत हो गई। मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों को दी जाने वाली दवाओं, खासकर कंबिनेशन मेडिसिन (संयोजन औषधियों) के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख रवैया अपनाया है। भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मीटिंग में तय किया गया कि डॉक्टर अब बच्चों के लिए कोई भी सिरप लिखते वक्त ज्यादा सावधानी बरतेंगे।

मप्र सरकार की बड़ी कार्रवाई

MP में फार्मेसी में बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के दवाओं की बिक्री को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मासूमों की मौत हृदय विदारक है, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बैठक में ये भी तय किया गया कि केंद्र और राज्य के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं हो।

रासायनिक टॉक्सिसिटी से गई बच्चों की जान

मप्र सरकार ने माना कि छिंदवाड़ा की घटना रासायनिक टॉक्सिसिटी से हुई है। मीटिंग में प्रमुख सचिव संदीप यादव ने बताया कि छिंदवाड़ा में बच्चों की मृत्यु के सभी पहलुओं की गहन जांच की गई। बच्चों के रीनल बायोप्सी रिपोर्ट में पता चला कि मौत एक्यूट ट्यूबुलर नेक्रोसिस की वजह से हुई है जो किसी रासायनिक टॉक्सिसिटी की ओर इशारा करता है।

बैठक में ये रहे मौजूद

मीटिंग में NHM के सीनियर अधिकारी, AIIMS भोपाल की डॉ. शिखा मलिक, IAP के डॉ. महेश माहेश्वरी, डॉ. अम्बर कुमार, सचिव डॉ. दिनेश मेकले, डॉ. भूपेश्वरी पटेल, GMC भोपाल की डॉ. मंजूषा गुप्ता, डॉ. राकेश टिक्कस, डॉ. राकेश सुखेजा, डॉ. श्रुति सरकार, डॉ. गुफरान अहमद और डॉ. राहुल खरे सहित बड़ी संख्या में शिशु रोग स्पेशलिस्ट मौजूद रहे।

कफ सिरप में था जहरीला केमिकल

प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि जांच में पता चला कि विषाक्त रसायन कफ सिरप में मौजूद था, जिसकी बिक्री अपना मेडिकल स्टोर, स्टेशन रोड, परासिया द्वारा की जा रही थी। ये मेडिकल स्टोर ज्योति सोनी के नाम से रजिस्टर्ड था, लेकिन वहां कोई रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट नहीं था। अधिकारियों ने बताया कि ये पूरा कैंपस डॉ. प्रवीण सोनी के अधिपत्य में था और उनकी जानकारी में अवैध रूप से दवाओं का वितरण हो रहा था। सरकार ने दोनों पर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी है, मेडिकल स्टोर को सील करके उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया है।

[caption id="attachment_909905" align="alignnone" width="944"]nhm meeting NHM मीटिंग के दौरान डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल[/caption]

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने ये कहा

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। ये घटना अत्यंत हृदय विदारक है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार डॉक्टरों के साथ मिलकर केंद्रीय और राज्य दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेगी।

कंबिनेशन मेडिसिन पर सख्ती

मीटिंग में बताया गया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने दिसंबर 2023 में ही क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट (2 mg) और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड (5 mg) के संयोजन वाली दवा को 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन कर दिया था। इसके बाद भी बाजार में ऐसी कई दवाएं बिक रही थीं। इसी तरह अक्टूबर 2025 में केंद्र ने फिर पत्र जारी करके बच्चों के लिए कफ सिरप के इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी थी।

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बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री पर लगे रोक

एम्स भोपाल की शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा मलिक ने चिंता जताई और कहा कि बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री रोकनी होगी। शेड्यूल-H ड्रग्स केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जानी चाहिए। हर बैच की जांच अनिवार्य होनी चाहिए। डॉ. राकेश मिश्रा ने कहा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों में कंबिनेशन मेडिसिन्स के उपयोग को पूरी तरह बैन किया जाना चाहिए।

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