Chhindwara Cough Syrup Case: दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने पर रोक, भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी

Chhindwara Cough Syrup Case: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौतों के बाद भारत सरकार की ओर से एक एडवाइजरी जारी की गई है।

Chhindwara Cough Syrup Case

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Chhindwara Cough Syrup Case: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौतों के बाद भारत सरकार की ओर से एक एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह दी गई है। शुक्रवार, 3 अक्टूबर, 2025 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा के नाम से एडवाइजरी जारी की गई है।

दरअसल, छिंदवाड़ा में किडनी की बीमारी से बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। बच्चों की मौत को लेकर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इन मौतों की वजह कफ सिरप बताई जा रही है। हालांकि, सरकार इससे इनकार कर रही है। ​ इलाज के दौरान नागपुर में एक बच्चे की मौत हो गई, जिसके बाद ये आंकड़ा 9 पहुंच गया है। 9वीं मौत की जानकारी परासिया SDM सौरभ कुमार यादव ने दी है।

जबलपुर से 16 सैंपल भोपाल लैब भेजे

मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय दल जबलपुर पहुंच था। ड्रग एवं औषधि विभाग ने कटारिया फार्मास्यूटिकल्स के यहां छापा मारा है। इसी फार्मा कंपनी ने छिंदवाड़ा के मेडिकल स्टोर्स में कफ सिरप की सप्लाई की थी। बताते हैं कटारिया फार्मास्यूटिकल्स न चेन्नई की कंपनी से 660 शीशी सिरप खरीदे थे। इन में से 594 शीशी कफ सिरप छिंदवाड़ा में सप्लाई की गई। मामले में ड्रग- औषधि विभाग ने 16 सैंपल भोपाल लैब में जांच के लिए भेजे हैं।

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कफ सिरप के उपयोग पर परामर्श

जिसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने बाल चिकित्सा जनसंख्या में कफ सिरप के तर्क संगत उपयोग पर एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। यह कदम बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए उठाया गया है। DGHS ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों को यह परामर्श जारी करते हुए जोर दिया है कि बच्चों में अधिकांश तीव्र कफ रोग (Acute Cough Illnesses) बिना किसी औषधीय हस्तक्षेप के स्वतः ही ठीक हो जाते हैं।

ये भी जारी किए दिशा-निर्देश

प्रतिबंध: 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं (कफ सिरप) न तो लिखी जानी चाहिए और न ही दी जानी चाहिए।
सावधानी: 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए भी इन दवाओं की आमतौर पर अनुशंसा नहीं की जाती है।
औषधीय उपयोग के नियम: 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए, किसी भी दवा के उपयोग से पहले कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।

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केयरफुल ​क्लिनिकल इवैल्यूएशन

  • कड़ी निगरानी (Close Supervision)।
  • उचित खुराक (Appropriate Dosing) और न्यूनतम प्रभावी अवधि (Shortest Effective Duration) का पालन।
  • कई दवाओं के संयोजन (Multiple Drug Combinations) से कड़ाई से बचना।

ऐसे करें प्राथमिक उपचार

  • पर्याप्त जलयोजन (Adequate Hydration)।
  • आराम (Rest)।
  • अन्य सहायक उपाय।

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गुणवत्ता और जागरूकता पर जोर

सभी स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं और क्लीनिकों को यह तय करना होगा कि वे केवल अच्छी प्रैक्टिसेस (Good Manufacturing Practices - GMP) के तहत निर्मित और फार्मास्युटिकल-ग्रेड एक्सिपिएंट्स से तैयार उत्पादों की ही खरीद और वितरण करें। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के डॉक्टरों और मेडिकल कारोबारियों का संवेदीकरण (Sensitization) जरूरी है।

जनता से भी कड़ाई से कराए पालन

एडवाइजरी में यह भी कहा है कि जनता को भी डॉक्टरों द्वारा दिए गए नुस्खे का कड़ाई से पालन करने के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। DGHS ने सभी क्षेत्रों में इसके प्रचार पर जोर दिया है।

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Chhindwara Cough Syrup Tragedy

Chhindwara Cough Syrup Tragedy: छिंदवाड़ा में किडनी की बीमारी से बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। बच्चों की मौत को लेकर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इन मौतों की वजह कफ सिरप बताई जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...

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