MP Children Death: तमिलनाडु और हिमाचल से आया बच्चों की मौत वाला कफ सिरप, सिर्फ छिंदवाड़ा में बैन, पूरे प्रदेश में बिक्री

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से छह बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। जांच में सामने आया है कि इस दवा में जहरीला केमिकल मिला हुआ था। यह सिरप तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश से आया था।

MP Children Death: तमिलनाडु और हिमाचल से आया बच्चों की मौत वाला कफ सिरप, सिर्फ छिंदवाड़ा में बैन, पूरे प्रदेश में बिक्री

हाइलाइट्स

  • छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 6 बच्चों की मौत।
  • कफ सिरप में पाया गया खतरनाक केमिकल।
  • तमिलनाडु और हिमाचल से आए संदिग्ध सिरप।

MP Chhindwara Children’s Death Cough Syrup Case: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल से 6 बच्चों की मौत के मामले में हुए खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। इन मासूमों की मौत का कारण एक जहरीला कफ सिरप बताया जा रहा है। जांच में पाया गया है कि जिन सिरपों का सेवन बच्चों ने किया, उनमें खतरनाक केमिकल 'डायएथिलीन ग्लायकॉल' की मौजूदगी थी। ये सिरप हिमाचल और तमिलनाडु की फार्मा कंपनियों से सप्लाई किए गए थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इसी की वजह से मासूमों की किडनी फेल हुई है। अब पूरे प्रदेश में मेडिकल अलर्ट जारी कर दिया गया है। दोनों सिरप पर बैन लगाने के साथ ही प्रदेशभर से सैंपल लिए जा रहे हैं।

मासूमों की मौत की वजह बना सिरप

छिंदवाड़ा जिले में बीते दिनों छह बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि बच्चों को जो कफ सिरप पिलाया गया, उसमें डायएथिलीन ग्लायकॉल नामक खतरनाक केमिकल पाया गया। यह केमिकल किडनी को सीधे नुकसान पहुंचाता है। कलेक्टर ने कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सट्रो-डीएस (Nextro-DS) की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। इस खांसी की दवाई को बच्चों की मौत का जिम्मेदार माना जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में 13 दवा संदिग्ध

इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की टीम ने उन सभी दवाओं के सैंपल एकत्रित किए हैं, जिनके पर्चे प्रभावित बच्चों के घरों से बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में 13 दवाओं को संदिग्ध माना गया है, जिनमें से 3 कफ सिरप प्रमुख रूप से शामिल हैं। सभी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कंट्रोलर दिनेश मौर्या ने बताया कि जिन 3 कफ सिरप के सैंपल लिए गए हैं, उनमें से एक इंदौर में ही बनता है। इंदौर में एआरसी सिरप बनाने वाली यूनिट में प्रोडक्शन पर रोक लगा दी गई है। नोटिस जारी किया गया है।

संदिग्ध सिरप तमिलनाडु-हिमाचल से सप्लाई

ड्रग कंट्रोलर ने पुष्टि की है कि ये सिरप तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की कंपनियों द्वारा बनाए गए थे और वहीं से छिंदवाड़ा समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में सप्लाई हुए थे। जिसकी पूरे प्रदेश में बिक्री जारी है। अब इन राज्यों के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों को पत्र भेजकर बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स साझा की गई हैं।

छह मासूमों की मौत के बाद छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सट्रो-डीएस (Nextro-DS) कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रारंभिक जांच में इन दोनों सिरप को ही बच्चों की मौत का संभावित कारण माना गया है।

इस गंभीर मामले को देखते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MP FDA) ने निर्देश दिए हैं कि बच्चों को दी गई हर दवा के सैंपल लेकर उनकी सघन जांच कराई जाए।

कफ सिरप सिर्फ छिंदवाड़ा में बैन

स्वास्थ्य विभाग यह जांच कर रहा है कि कहीं बच्चों की हालत बिगड़ने के पीछे किसी और दवा में भी गड़बड़ी तो नहीं थी। छिंदवाड़ा कलेक्टर ने फिलहाल दो कफ सिरप की बिक्री प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इन सिरप की बिक्री प्रदेश के अन्य जिलों में अब भी जारी है। अधिकारियों का तर्क है कि जब तक जांच रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि मौतें इन्हीं सिरप के कारण हुई हैं, तब तक राज्यस्तरीय प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या सख्त कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतज़ार ज़रूरी है, या फिर और किसी मासूम की जान जाने के बाद ही ठोस कदम उठाए जाएंगे? जांच रिपोर्ट आने में अभी कम से कम 7 दिन लग सकते हैं।

प्रिस्क्रिप्शन में शामिल सभी दवाओं की जांच

ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि कोल्ड्रिफ और नेक्सट्रो-डीएस के अलावा डीफ्रोस्ट (Defrost) सिरप इन तीन कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए लिए गए हैं। बच्चों के प्रिस्क्रिप्शन में शामिल सभी दवाओं के सैंपल भी जांच में भेजे गए हैं।

FDA के साथ CDSCO ने भी प्रदेशभर में रैंडम सैंपलिंग की है। संदिग्ध सिरप की मैन्युफैक्चरिंग तमिलनाडु और हिमाचल की कंपनियों ने की थी। दोनों राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को चिट्ठी भेजकर कंपनी और बैच नंबर की जानकारी दी गई है। सैंपल टेस्टिंग शुरू हो चुकी है और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेशभर में CDSCO की जांच तेज

CDSCO की टीम ने पूरे प्रदेश में रैंडम सैंपलिंग के जरिए संदिग्ध कफ सिरप के सैंपल एकत्र किए हैं। यह कार्रवाई संभावित खतरे का सही आकलन करने के लिए की गई है।

जिलों को किया गया अलर्ट

ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य ने सभी जिलों की टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। किसी भी संदिग्ध मामले की तत्काल रिपोर्ट मांगी गई है। फिलहाल निरीक्षण और सैंपल कलेक्शन का कार्य जारी है।

ये खबर भी पढ़ें...MP Children Kidney Failure: मासूमों के लिए जानलेवा बना ये कफ सिरप, किडनी फेल से बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने किया बैन

राजस्थान में भी मौत, सप्लाई का कनेक्शन इंदौर से

मध्यप्रदेश के साथ ही राजस्थान में भी कफ सिरप से बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए हैं। भरतपुर (बयाना) और सीकर जिलों में बच्चों की किडनी में टॉक्सिन से गंभीर इंजरी के केस मिले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड युक्त खांसी की सिरप पीने के बाद एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि अन्य की हालत नाज़ुक बताई जा रही है। घटना के बाद राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने इस कॉम्बिनेशन वाली सभी दवाओं के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है।

मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत ये सिरप जयपुर की KAYSONS Pharma और इंदौर की Samkem Pharma द्वारा सप्लाई की जा रही थीं। राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) ने इंदौर की कंपनी की सप्लाई भी जांच पूरी होने तक रोक दी है।

हमें XFacebookWhatsAppInstagram पर फॉलो करें। हमारे यू-ट्यूब चैनल Bansal News MPCG को सब्सक्राइब करें।

यह भी पढ़ें
Here are a few more articles:
Read the Next Article