छत्तीसगढ़ में घोटाले की साजिश: 19 करोड़ के मुआवजे पर बड़े सवाल, 23 से ज्यादा संदिग्ध नाम, पात्रता सूची में मिली गड़बड़ी

(रिपोर्ट: दीपक कश्यप, अम्बिकापुर) Mainpat compensation scam: मैनपाट में बॉक्साइट खदान से प्रभावित लोगों को दिए जाने वाले करीब 19 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण में गड़बड़ी उजागर हुई है। जिसमें कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले में जांच कमेटी गठित कर दी है। 

Mainpat compensation scam

Mainpat compensation scam: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। जहां मैनपाट क्षेत्र में बॉक्साइटखदान से प्रभावित लोगों को वितरित किए जाने वाले करीब 19 करोड़ रुपये के मुआवजे में गड़बड़ी और संभावित घोटाले की साजिश का खुलासा हुआ है।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मुआवजा वितरण प्रक्रिया में कई स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है।

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि प्रारंभिक जांच में कुछ अनियमितताओं के प्रकरण पाए गए हैं, जिसके आधार पर विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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तहसीलदार और पटवारी अटैच

बता दें, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मैनपाट के तहसीलदार और संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से जिला कार्यालय अटैच कर दिया है। यह कदम प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने और जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया गया है।

 सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक स्तर पर ही भूमि अभिलेखों और पात्रता सूची में गड़बड़ी के संकेत मिले थे। जिसमें कुछ दस्तावेजों में जमीन की प्रकृति और स्वामित्व को लेकर विरोधाभास सामने आए हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।

जांच कमेटी का गठन

कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा गठित जांच समिति को निर्देश दिया गया है कि वह नियत समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। समिति मुआवजा स्वीकृति प्रक्रिया, पात्र हितग्राहियों की सूची, भूमि अभिलेखों और बैंक खातों के सत्यापन की गहन जांच करेगी।  

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फर्जीवाड़े के आरोप

मौजूदा जानकारी के मुताबिक बक्साइट खदान से प्रभावित लोगों के नाम पर मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है। बताया जा रहा है कि जिन व्यक्तियों के पास वैध भूमि स्वामित्व नहीं है, उनके नाम पर भी मुआवजा स्वीकृत करने की तैयारी थी।

जिसमें 23 से अधिक ऐसे लोगों को भुगतान सूची में शामिल किया गया था जिनके नाम पर जमीन दर्ज ही नहीं है। इसके अलावा मैनपाट के उरंगा गांव के 220 और बरिमा गांव के 24 लोगों को मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

फिलहाल, जांच समिति इन सभी मामलों की बारीकी से पड़ताल करेगी कि वास्तविक पात्र कौन हैं और किन आधारों पर सूची तैयार की गई।

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हाई प्रोफाइल कनेक्शन

मामले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेटे के फार्म हाउस को कृषि भूमि दर्शाकर मुआवजा स्वीकृत करने की बात भी सामने आई है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अगर जांच में यह आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।

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आगे क्या?

बता दें, जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल जिला प्रशासन ने संबंधित फाइलों, राजस्व अभिलेखों और बैंक विवरणों की जांच शुरू कर दी है। संभावित फर्जी दावों की सूची तैयार की जा रही है और पात्र हितग्राहियों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने मैनपाट क्षेत्र में प्रशासनिक पारदर्शिता और मुआवजा वितरण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और संभावित कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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