सूरजपुर में वन विभाग के रेस्ट हाउस में अश्लील डांस का वीडियो वायरल: डिप्टी रेंजर और वनपाल सस्पेंड, रेंजर को नोटिस जारी

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में कुमली वाटरफॉल स्थित वन विभाग के रेस्ट हाउस में अश्लील डांस का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।

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Surajpur Dirty Dance Case: छत्तीसगढ़ में सरकारी परिसरों के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की कड़ी में अब सूरजपुर जिले का नाम भी जुड़ गया है। सूरजपुर के कुमली वाटरफॉल स्थित वन विभाग के रेस्ट हाउस में अश्लील डांस और शराब पार्टी का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने वन विभाग की कार्यशैली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल

गरियाबंद के बाद अब सूरजपुर जिले से सामने आए इस अश्लील डांस वीडियो ने लोगों को चौंका दिया है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वन विभाग के रेस्ट हाउस के भीतर बार बालाओं का अश्लील डांस कराया जा रहा है और खुलेआम शराब पार्टी चल रही है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो वर्तमान समय का नहीं है, बल्कि पुराना है, लेकिन इसके सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया।

वन विभाग के अधिकारियों पर गिरी गाज

मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है। डिप्टी रेंजर रविशंकर तिवारी और वनपाल शैलेश टीना लकड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रामानुजनगर के तत्कालीन रेंजर आर.सी. प्रजापति को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस को FIR के लिए लिखा गया पत्र

वन मंडल अधिकारी (DFO) ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर वीडियो में नजर आ रहे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी रेस्ट हाउस का इस तरह से दुरुपयोग किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रेस्ट हाउस में नियमों की उड़ाई गई धज्जियां

वायरल वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि वन विभाग के रेस्ट हाउस में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखा गया। जहां एक ओर ये रेस्ट हाउस अधिकारियों और शासकीय कार्यों के लिए बनाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर वहां शराब पार्टी और अश्लील डांस का आयोजन होना बेहद गंभीर मामला है। इससे विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों से सरकारी परिसरों में इस तरह की गतिविधियों के वीडियो सामने आ चुके हैं। हर बार कार्रवाई के बाद सवाल यही उठता है कि आखिर ऐसे मामलों पर पहले नजर क्यों नहीं रखी जाती। कुमली वाटरफॉल मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

वन विभाग और पुलिस दोनों ही इस मामले की जांच में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रहे सभी लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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