CG NEW: डिप्टी रेंजर पर शासकीय जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप, स्थानीय विरोध के बाद राजस्व टीम ने रुकवाई कार्रवाई

(रिपोर्ट: दीपक कश्यप,अंबिकापुर) अंबिकापुर में रोजगार कार्यालय की शासकीय भूमि पर कब्जे के प्रयास का मामला सामने आया। वन विभाग के डिप्टी रेंजर पर आरोप लगे। स्थानीय विरोध के बाद राजस्व विभाग ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई रुकवाई।

ambikapur encrochment

CG NEWS: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर से लगे क्षेत्र में शासकीय भूमि पर कब्जे की कोशिश का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। रोजगार कार्यालय से सटी सरकारी जमीन पर कथित रूप से अवैध घेराबंदी किए जाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे स्थानीय लोगों के विरोध और राजस्व विभाग की त्वरित कार्रवाई के बाद रोक दिया गया।

सुबह से चल रहा था घेराबंदी का काम

स्थानीय लोगों के अनुसार रविवार सुबह से ही रोजगार कार्यालय के पास स्थित शासकीय भूमि पर ग्रीनमैट लगाकर घेराबंदी की जा रही थी। शुरुआत में लोगों को लगा कि कोई अधिकृत निर्माण कार्य चल रहा होगा, लेकिन जब जमीन को स्थायी रूप से घेरने जैसी गतिविधियां दिखाई दीं तो संदेह गहरा गया।

डिप्टी रेंजर पर लगे कब्जे के आरोप

क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग में पदस्थ एक डिप्टी रेंजर द्वारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी शहर से लगे चेन्द्रा बीट क्षेत्र में पदस्थ हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन आरोपों के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।

स्थानीय लोगों ने किया विरोध

जैसे ही लोगों को कब्जे की आशंका हुई, आसपास के नागरिक मौके पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने कहा कि शासकीय भूमि पर इस तरह का कब्जा भविष्य में बड़े विवाद का कारण बन सकता है। विरोध बढ़ता देख मामले की सूचना तुरंत रोजगार कार्यालय और प्रशासन को दी गई।

रोजगार कार्यालय के अधिकारी पहुंचे मौके पर

सूचना मिलने के बाद रोजगार कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी स्थल पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जमीन की घेराबंदी का प्रयास किया जा रहा था। इसके बाद राजस्व विभाग को तत्काल सूचना दी गई।

राजस्व विभाग की टीम ने रुकवाई कार्रवाई

राजस्व विभाग की टीम, जिसमें आरआई और पटवारी शामिल थे, मौके पर पहुंची और जमीन की स्थिति का परीक्षण किया। अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से घेराबंदी और कब्जे की प्रक्रिया को रुकवा दिया। प्रशासन ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों और स्वामित्व रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

जांच के बाद हो सकती है कानूनी कार्रवाई

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि जांच में कब्जे का प्रयास अवैध पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में सख्ती बरती जाएगी।

सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर उठे सवाल

घटना के बाद क्षेत्र में सरकारी जमीनों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विरोध नहीं किया जाता तो जमीन पर स्थायी कब्जा हो सकता था।

नागरिकों ने प्रशासन से सरकारी भूमि की नियमित निगरानी और सीमांकन सुनिश्चित करने की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीनों पर नजर रखने और अवैध कब्जों को रोकने के लिए प्रशासन और नागरिकों दोनों की सतर्कता आवश्यक है।

यह भी पढ़ें
Here are a few more articles:
Read the Next Article