पद्मश्री पुरस्कार 2026 में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि: बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ और निःशुल्क इलाज देने वाले गोडबोले दंपत्ति को पद्मश्री सम्मान

दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती और बस्तर के दुर्गम इलाकों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा देने वाले डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है।

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Chhattisgarh Padma Shri Award 2026: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में छत्तीसगढ़ की तीन विशिष्ट हस्तियों का नाम शामिल होना पूरे राज्य के लिए सम्मान और गौरव की बात है। समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती, वहीं चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में दशकों से कार्य कर रहे डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा। गोडबोले दंपत्ति को यह सम्मान संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

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मुख्यमंत्री ने दी बधाई

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीनों विभूतियों को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इन सभी ने अपनी सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता से राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

बस्तर अंचल से जुड़ा विशेष महत्व

यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पद्मश्री से सम्मानित की जा रही तीनों हस्तियां बस्तर अंचल के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से सेवा कार्य कर रही हैं। जहां सामान्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, वहां इन्होंने समाज और मानवता की सेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाया।

बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताती

बुधरी ताती ने कई गांवों में नशाखोरी के खिलाफ अभियान चलाया।

दंतेवाड़ा जिले के हीरानार ग्राम की निवासी बुधरी ताती को महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। वर्ष 1984 से वे लगातार वनांचल क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान, साक्षरता, सामाजिक जागरूकता और महिला-बालिका शिक्षा के लिए कार्य कर रही हैं।

बुधरी ताती अब तक 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और वृद्धजनों की सेवा में समर्पित कर दिया है। उनके स्नेह और समर्पण के कारण स्थानीय लोग उन्हें सम्मान से ‘बड़ी दीदी’ कहकर बुलाते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी उन्हें पहले कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

दुर्गम इलाकों में निःशुल्क इलाज देने वाला गोडबोले दंपत्ति

चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. गोडबोले और उनकी पत्नी पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे अत्यंत दुर्गम आदिवासी इलाकों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे हैं।

‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के जरिए जनसेवा

गोडबोले दंपत्ति ने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से उन गांवों तक इलाज पहुंचाया है, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। वे पैदल या सीमित संसाधनों के सहारे इन इलाकों में पहुंचते हैं और नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाकर मरीजों का उपचार करते हैं। कुपोषण उन्मूलन, स्वास्थ्य जागरूकता और प्राथमिक उपचार को आम लोगों तक पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है।

पद्मश्री सम्मान के लिए इन विभूतियों का चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल की सेवा भावना और मानवीय मूल्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला क्षण है। यह सम्मान समाजसेवा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनेगा।

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