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CG PCC List Controvercy: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हाल ही में जारी संगठनात्मक नियुक्तियों की सूची में बड़ी और चौंकाने वाली चूक सामने आई है। सूची में एक ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिनका कई महीने पहले निधन हो चुका है। इस घटना के बाद कांग्रेस संगठन की कार्यप्रणाली, आंतरिक संवाद और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
22 अगस्त 2025 को हुआ था निधन
गरियाबंद जिले से सामने आए इस मामले में बताया गया है कि पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष स्वर्गीय रुपेंद्र सोम का 22 अगस्त 2025 को निधन हो चुका था। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस की सूची में उनका नाम शामिल कर उन्हें इंदागांव मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
सूची देखकर चौंके कार्यकर्ता और जनता
जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता में हैरानी और नाराज़गी देखने को मिली। दिवंगत नेता को संगठन में नई जिम्मेदारी दिए जाने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद कांग्रेस संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।
लोग यह जानना चाहते हैं कि इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई और सूची जारी करने से पहले किसी स्तर पर सत्यापन क्यों नहीं किया गया।
दिवंगत नेता की छवि रही मजबूत
स्वर्गीय रुपेंद्र सोम कांग्रेस के सक्रिय और सम्मानित नेता रहे हैं। वे अपने जीवनकाल में ब्लॉक अध्यक्ष के पद पर रह चुके थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान थी। उनके निधन के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की थी।
ऐसे में अब उनका नाम नई नियुक्ति सूची में आना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि दिवंगत नेता और उनके परिवार की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
जिला और प्रदेश नेतृत्व पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जिला कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी दोनों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जिला स्तर पर सही जानकारी और रिपोर्टिंग होती, तो यह गलती रोकी जा सकती थी।
वहीं, प्रदेश स्तर पर सूची जारी करने से पहले संबंधित नामों और पदों का सत्यापन किया जाना चाहिए था।
संगठन के भीतर दो राय
कांग्रेस संगठन के भीतर इस घटना को लेकर दो तरह की चर्चाएं हैं। एक पक्ष इसे तकनीकी चूक मान रहा है, जबकि दूसरा इसे संगठन में संवाद के अभाव का परिणाम बता रहा है।
कुछ नेताओं का कहना है कि पुराने डाटा या फाइल के आधार पर सूची तैयार की गई होगी, जिसे अपडेट नहीं किया गया। वहीं, आलोचकों का आरोप है कि संगठन में जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक तालमेल की भारी कमी है।
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