छत्तीसगढ़ में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की तैयारी, राज्य निर्वाचन आयोग ने भेजा प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख बढ़ाई जा सकती है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में केंद्रीय निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भेजा है।

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Chhattisgarh Voter List SIR: छत्तीसगढ़ में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला जल्द सामने आ सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावा-आपत्ति की मौजूदा समय-सीमा को एक सप्ताह बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेजा है। अब केंद्रीय स्तर से मंजूरी मिलने के बाद इस पर आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।

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लाखों मामलों का सत्यापन अब भी अधूरा

दरअसल, SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनका सत्यापन तय समय में पूरा नहीं हो पाया। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में लाखों मतदाताओं से जुड़े नोटिस अब भी पेंडिंग हैं। इसके अलावा हजारों प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें सुनवाई हो चुकी है लेकिन अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। इन्हीं लंबित मामलों को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

22 जनवरी तक तय है मौजूदा समय-सीमा

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, छत्तीसगढ़ में दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 जनवरी निर्धारित की गई है। इसके बाद 22 जनवरी से 21 फरवरी तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। इस अवधि में नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, बल्कि पहले से जमा दावों और आपत्तियों का ही सत्यापन किया जाएगा।

6.40 लाख मतदाता ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में

निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया में लगभग 6.40 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें ‘नो-मैपिंग’ की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन मतदाताओं तक भौतिक रूप से नहीं पहुंच सके। कई मामलों में पता नहीं मिलना, घर बंद होना या लंबे समय से उस पते पर निवास न होना इसकी वजह बताई गई है।

नोटिस के बाद दस्तावेज पेश करना अनिवार्य

ऐसे सभी नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को तय समय-सीमा में एसडीएम के सामने उपस्थित होकर 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। दस्तावेजों की जांच के बाद ईआरओ यह तय करेंगे कि नाम मतदाता सूची में रहेगा या हटाया जाएगा। ईआरओ के फैसले से असंतुष्ट मतदाता को जिला कलेक्टर के पास अपील का अधिकार भी दिया गया है।

2003 की सूची बनी आधार, आगे बढ़ेगी चुनौती

फिलहाल इस SIR प्रक्रिया में 2003 की मतदाता सूची को आधार माना गया है। जांच के दौरान यह देखा जा रहा है कि संबंधित मतदाता का नाम 2003 की सूची में दर्ज था या नहीं। जिनके नाम नहीं मिल रहे हैं, उनसे रिश्तेदारों के नाम और संदर्भ मांगे जा रहे हैं। जिन मामलों में यह भी उपलब्ध नहीं है, उन्हें ‘सी कैटेगरी’ में रखकर अलग से नोटिस जारी किए गए हैं।

राजनीतिक हलचल भी तेज

SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात की है। पार्टी का आरोप है कि कई जगहों पर ईआरओ और बीएलओ स्तर पर फॉर्म स्वीकार नहीं किए जा रहे, जिससे योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर रह जा रहे हैं।

इन सभी पहलुओं को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। अब सबकी नजर केंद्रीय निर्वाचन आयोग की मंजूरी और अंतिम फैसले पर टिकी है।

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