छत्तीसगढ़ में नए वित्त वर्ष में नहीं बदलेगी कलेक्टर गाइडलाइन: जमीन खरीददारों को मिलेगी राहत, इस बार नहीं कराया जाएगा जमीन का नया सर्वे

छत्तीसगढ़ में जमीन की सरकारी कीमतों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राजधानी रायपुर समेत पूरे राज्य में जो कलेक्टर गाइडलाइन अभी लागू है, उसे ही वित्त वर्ष 2026-27 तक जारी रखने की तैयारी है।

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Chhattisgarh Collector Guideline: छत्तीसगढ़ में जमीन की सरकारी कीमतों को लेकर आम लोगों, बिल्डरों और निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। छत्तीसगढ़ सरकार मौजूदा कलेक्टर गाइडलाइन को ही आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भी लागू रखने की तैयारी कर रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि अभी जो जमीन की सरकारी दरें तय की गई हैं, वे 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी।

राजस्व विभाग के अफसरों का कहना है कि नई कलेक्टर गाइडलाइन इसी वित्तीय वर्ष में तैयार की गई है। इसे बनाने से पहले जमीनों का ठोस सर्वे, कई चरणों की जांच और परीक्षण किया गया था। ऐसे में महज तीन महीने के भीतर जमीन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं माना जा रहा। इसी वजह से तहसीलों से दोबारा जमीनों का सर्वे भी नहीं कराया जाएगा।

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सर्वे न कराने के पीछे प्रशासनिक मजबूरी

नियमानुसार हर साल जनवरी से नई कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। तहसीलों से प्रस्ताव मंगाए जाते हैं, आरआई और पटवारी रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिसे तहसीलदार कलेक्टर को भेजते हैं। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति और फिर राज्य मूल्यांकन समिति की मंजूरी के बाद 1 अप्रैल से नई दरें लागू होती हैं।

लेकिन इस बार गाइडलाइन में व्यापक बदलाव किए गए हैं और यह प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है। ऐसे में ढाई से तीन महीने के भीतर फिर से सर्वे कराना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इसमें राजस्व विभाग के बड़े अमले को लगाया जाता है।

बड़े विकास कार्यों पर तुरंत बढ़ेगी कीमत

अफसरों ने साफ किया है कि यदि किसी शहर या इलाके में फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, एमआर रोड या कोई अन्य बड़ा विकास कार्य होता है, तो वहां जमीन की कीमत को तुरंत रिवाइज करने की अनुमति होगी। अब जमीन की दरें बढ़ाने के लिए पूरे साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह नया सिस्टम पहली बार छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है।

आपत्तियों के लिए बनेगी एक्सपर्ट टीम

नई कलेक्टर गाइडलाइन जारी होने के बाद इसे लेकर खासा विवाद भी हुआ था। कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और आम लोगों से सुझाव मांगे गए। राजधानी रायपुर में 100 से अधिक और पूरे राज्य में करीब 2000 आपत्तियां दर्ज की गईं।

राजस्व विभाग का दावा है कि सभी आपत्तियों का गंभीरता से निराकरण किया जाएगा। इसके लिए एक्सपर्ट की एक विशेष टीम बनाई जाएगी, जो जिलों के पंजीयन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन की कीमतों की समीक्षा करेगी। खासतौर पर उन इलाकों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां दरें कम करने की मांग की जा रही है।

पहली बार लागू होगा डायनामिक रेट सिस्टम

छत्तीसगढ़ में पहली बार जमीन की रजिस्ट्री दरें डायनामिक होंगी। अब तक साल में एक बार ही जमीन की कीमतें तय होती थीं, लेकिन अब किसी भी शहर या इलाके में विकास कार्य शुरू होते ही दरें बदली जा सकेंगी। जिलों से रिपोर्ट आने के बाद स्टेट कमेटी इसे मंजूरी देगी। इससे जमीन की सरकारी कीमतें हकीकत के ज्यादा करीब होंगी।

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