छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना पर संकट: निजी अस्पतालों ने काम बंद करने का किया ऐलान, जुलाई 2025 से अब तक नहीं हुआ भुगतान

छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत भुगतान को लेकर निजी अस्पतालों में गहरा असंतोष है। अस्पताल संचालकों का आरोप है कि जुलाई 2025 से अब तक भुगतान नहीं हुआ है।

CG Private Hospital Strike

CG Private Hospital Strike: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश भर के निजी अस्पतालों में भुगतान नहीं होने से भारी नाराजगी देखी जा रही है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि जुलाई 2025 से अब तक आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज का एक भी भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा जनवरी से मार्च 2025 की अवधि का करीब 90 प्रतिशत भुगतान भी अब तक लंबित है।

अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि बार-बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराने के बावजूद इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है। इसी कारण निजी अस्पताल संचालकों और अस्पतालों में कार्यरत पैरामेडिकल स्टाफ ने हड़ताल का रास्ता अपनाने का फैसला किया है।

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AHPI की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

इस भुगतान संकट को लेकर एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर इंडिया (AHPI) की पिछले रविवार को एक अहम बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अनियमित भुगतान, पारदर्शिता की कमी और महीनों से लंबित बकायों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आज छत्तीसगढ़ के सभी निजी अस्पताल संचालक और पैरामेडिकल स्टाफ काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस दिन प्रतीकात्मक रूप से अस्पतालों में काम बंद रखा जाएगा।

मरीजों से की जाएगी विनम्र अपील

अस्पताल संघ ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल के दिन अस्पतालों में आने वाले मरीजों से अगले दिन आने का विनम्र निवेदन किया जाएगा। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को लेकर अलग-अलग अस्पताल अपने स्तर पर निर्णय ले सकते हैं, लेकिन नियमित सेवाएं ठप रहने की संभावना है।

अस्पताल संचालकों की प्रमुख मांगें

निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि जिस तरह छत्तीसगढ़ सरकार महतारी वंदन योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को हर महीने तय तिथि पर भुगतान सुनिश्चित करती है, उसी तरह आयुष्मान भारत योजना में भी समयबद्ध और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

अस्पताल संघ का कहना है कि आयुष्मान योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन भुगतान में लगातार देरी से निजी अस्पताल इस योजना से जुड़ने में हिचकिचा रहे हैं। इसका सीधा असर मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबे समय तक चलता रहा, तो आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज कराने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पहले से ही कई अस्पताल भुगतान न मिलने के कारण आयुष्मान मरीजों को भर्ती करने से बच रहे हैं।

आंदोलन और तेज करने की चेतावनी

अस्पताल संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लंबित बकायों का भुगतान नहीं किया गया और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। इसमें प्रदेश स्तर पर बड़े प्रदर्शन और लंबी हड़ताल भी शामिल हो सकती है।

कुल मिलाकर, आयुष्मान भारत योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में स्थिति गंभीर होती जा रही है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है कि इस संकट का समाधान कैसे और कब निकाला जाता है।

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