सरगुजा ओलंपिक 2026 के लोगो और शुभंकर ‘गजरु’ का अनावरण: जिले की खेल प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच, तीन स्तरों पर होंगी प्रतियोगिताएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समारोह में सरगुजा ओलंपिक 2026 के लोगो और शुभंकर ‘गजरु’ का अनावरण किया। अब सरगुजा की खेल प्रतिभाओं को भी राज्य स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का मजबूत मंच मिलेगा।

Surguja Olympic 2026

Surguja Olympic 2026: छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित गरिमामयी समारोह में सरगुजा ओलंपिक 2026 के प्रतीक चिन्ह (लोगो) और शुभंकर ‘गजरु’ का विधिवत अनावरण किया। यह आयोजन बस्तर ओलंपिक की तर्ज पर किया जा रहा है, जिसने पहले ही प्रदेशभर में खेल प्रतिभाओं को नई उड़ान दी है।

सरगुजा की प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा अवसर

मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर सरगुजा अंचल के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिस तरह बस्तर ओलंपिक ने वहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया, उसी तरह अब सरगुजा ओलंपिक इस अंचल के खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत मंच बनेगा। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास का माध्यम है।

लोगो में दिखी सरगुजा की पहचान

बस्तर ओलंपिक की तर्ज पर सरगुजा ओलंपिक का होगा आयोजन, मुख्यमंत्री ने लोगो और शुभंकर ‘गजरु’ का किया अनावरण

सरगुजा ओलंपिक 2026 का लोगो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और खेल भावना का जीवंत प्रतीक है। लोगो के केंद्र में मैनपाट स्थित प्रसिद्ध टाइगर पॉइंट जलप्रपात को दर्शाया गया है, जो हरियाली, ऊर्जा और निरंतर प्रवाह का प्रतीक माना जाता है। मध्य भाग में अंकित “सरगुजा ओलंपिक 2026” न केवल आयोजन की पहचान है, बल्कि स्थानीय गौरव और अस्मिता को भी दर्शाता है।

लोगो के चारों ओर 12 खेलों के प्रतीक चिन्ह बनाए गए हैं, जो समावेशिता और समान अवसर का संदेश देते हैं। रंगों का संयोजन आयोजन की जीवंतता, उत्साह और एकता को सामने लाता है। विशेष रूप से लाल रंग का उपयोग पहाड़ी कोरवा जनजाति की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है, जहां इसे शक्ति, साहस और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

शुभंकर ‘गजरु’ का खास संदेश

सरगुजा ओलंपिक 2026 का शुभंकर ‘गजरु’ भी काफी सोच-समझकर चुना गया है। आदिवासी समाज में हाथी को बल, धैर्य, बुद्धिमत्ता और एकता का प्रतीक माना जाता है। ‘गजरु’ की विशेषताएं शक्ति, अनुशासन, संतुलन और निरंतर प्रयास खेल भावना से सीधा जुड़ाव रखती हैं। हाथी का झुंड में चलना टीमवर्क और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक है।

तीन स्तरों पर होंगी प्रतियोगिताएं

सरगुजा ओलंपिक का आयोजन विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए 28 दिसंबर 2025 से 25 जनवरी 2026 तक पंजीयन प्रक्रिया चली, जिसमें सरगुजा संभाग के 6 जिलों से करीब 3 लाख 50 हजार लोगों ने पंजीयन कराया। इनमें 1 लाख 59 हजार पुरुष और 1 लाख 89 हजार महिलाएं शामिल हैं, जो महिला सहभागिता की मजबूत तस्वीर पेश करता है।

12 खेलों में दिखेगा दमखम

इस आयोजन में कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कुश्ती, रस्साकसी समेत कुल 12 खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं होंगी। इससे ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव खेल यशवंत कुमार, संचालक खेल तनुजा सलाम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने सरगुजा ओलंपिक को खेल और सामाजिक एकता का उत्सव बताया।

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